‘दाल का कटोरा’ बनेगा विकास का मॉडल? विधान परिषद में गूंजा मोकामा टाल, मिल-भंडारण से लेकर जल प्रबंधन तक सरकार से मांगा रोडमैप
एक लाख हेक्टेयर का सवाल
नीरज कुमार ने कहा कि मोकामा टाल क्षेत्र करीब एक लाख हेक्टेयर में फैला है और दाल उत्पादन के लिहाज से राज्य का बेहद अहम इलाका है। उन्होंने यहां दाल मिलों की स्थापना, आधुनिक भंडारण व्यवस्था और मार्केटिंग की मजबूत रणनीति बनाने की जरूरत बताई।
उन्होंने सुझाव दिया कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से दाल मिलें स्थापित की जाएं, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और उचित कीमत मिल सके।
सरकार का जवाब: तैयारी जारी
सरकार की ओर से कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि टाल क्षेत्र में दाल उत्पादन और उसके विपणन को व्यवस्थित करने के लिए विभाग ठोस प्रक्रिया तैयार कर रहा है। उनका दावा था कि उत्पादन से लेकर भंडारण और मार्केटिंग तक पूरी श्रृंखला को मजबूत किया जाएगा, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी हो।
वहीं जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने टाल क्षेत्र को बिहार का “दाल का कटोरा” बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का इस इलाके पर विशेष फोकस है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल प्रबंधन को सुदृढ़ करने और समग्र विकास के लिए व्यापक योजना पर काम हो रहा है।
विकास, आय और बाजार पर चर्चा
सरकार के जवाब के बाद सदन में मोकामा टाल के भविष्य, किसानों की आय बढ़ाने और दाल उत्पादन को राज्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ने को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
अब नजर इस बात पर है कि ‘दाल का कटोरा’ कहलाने वाला यह क्षेत्र सिर्फ पहचान तक सीमित रहेगा या योजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद किसानों की तकदीर भी बदलेगी।