RJD में थमेगा सियासी तूफान या बढ़ेगी दरार? इस्तीफे के बाद अब्दुल बारी सिद्दीकी से मिले मृत्युंजय तिवारी
Bihar news: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के वरिष्ठ नेता और पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल मृत्युंजय तिवारी के इस्तीफे के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, पार्टी छोड़ने के ऐलान के अगले ही दिन उनकी RJD के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल बारी सिद्दीकी से हुई मुलाकात ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। अब राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या तिवारी अपने इस्तीफे के फैसले पर कायम रहेंगे या पार्टी नेतृत्व के मनाने पर वापस लौट सकते हैं।
सिद्दीकी ने लालू यादव से मिलने की दी सलाह
अब्दुल बारी सिद्दीकी ने मुलाकात की पुष्टि करते हुए बताया कि मृत्युंजय तिवारी अपनी नाराजगी लेकर उनसे मिलने पहुंचे थे। उन्होंने तिवारी से आग्रह किया कि वे कोई अंतिम फैसला लेने से पहले अपनी बात पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सामने रखें।
सिद्दीकी ने कहा कि बातचीत के दौरान तिवारी ने आश्वासन दिया है कि वे जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे और लालू प्रसाद यादव से मुलाकात करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि बातचीत के बाद सकारात्मक समाधान निकल सकता है।
क्यों दिया था इस्तीफा?
मृत्युंजय तिवारी ने 16 जुलाई को RJD की प्राथमिक सदस्यता समेत सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की थी। उन्होंने पार्टी में पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, सम्मान की कमी और संगठन के अंदरूनी कामकाज को लेकर नाराजगी जाहिर की थी।
उन्होंने आरोप लगाया था कि पार्टी में कुछ ऐसे लोग प्रभावी हो गए हैं, जिनकी वजह से समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी हो रही है। तिवारी का कहना था कि उन्होंने अपनी पीड़ा नेतृत्व तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
RJD का मजबूत चेहरा रहे हैं मृत्युंजय तिवारी
मृत्युंजय तिवारी लंबे समय तक RJD के सबसे सक्रिय प्रवक्ताओं में शामिल रहे हैं। वर्ष 2006 में पार्टी से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में लगातार अहम जिम्मेदारियां निभाईं। वर्ष 2014 में लालू प्रसाद यादव ने उन्हें पार्टी का प्रवक्ता और मीडिया प्रभारी बनाया, जिसके बाद वे मीडिया में RJD का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे।
राजनीतिक संकट हो या चुनावी माहौल, मृत्युंजय तिवारी लगातार पार्टी और लालू परिवार का पक्ष मजबूती से रखते रहे। यही कारण है कि उनके इस्तीफे को RJD के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
क्या बदल जाएगा फैसला?
अब सबकी नजर संभावित लालू प्रसाद यादव और मृत्युंजय तिवारी की मुलाकात पर टिकी है। यदि बातचीत के बाद तिवारी अपना इस्तीफा वापस लेते हैं तो यह RJD नेतृत्व के लिए बड़ी राहत होगी। वहीं, यदि वे अपने फैसले पर अडिग रहते हैं तो पार्टी को अपने प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में से एक को खोना पड़ सकता है।
बिहार में आगामी राजनीतिक गतिविधियों और उपचुनावों के बीच यह घटनाक्रम RJD के लिए अहम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में लालू यादव से होने वाली मुलाकात यह तय करेगी कि मृत्युंजय तिवारी की राजनीतिक पारी RJD में जारी रहेगी या फिर वे नया रास्ता चुनेंगे।