कोडीन कफ सिरप पर NDPS लगाना गलत: पटना हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, पुलिस पर ‘दुरुपयोग’ का आरोप
यह टिप्पणी जस्टिस अशोक कुमार पांडेय की एकल पीठ ने उस दौरान की, जब मंसी थाना कांड संख्या 218/2025 में दर्ज मामले में जमानत याचिका पर सुनवाई की जा रही थी।
क्या है मामला?
पुलिस के अनुसार, एक स्कॉर्पियो वाहन से 100-100 ml की 1200 बोतल RTX-SCEN कफ सिरप बरामद की गई, जिसमें कोडीन मौजूद था। इसके बाद केस को Bihar Prohibition and Excise Act से बदलकर NDPS एक्ट की धाराओं में दर्ज कर दिया गया।
बचाव पक्ष की दलील
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि:
• उन्हें झूठा फंसाया गया है
• बरामदगी उनकी “सचेत कब्जे” से नहीं हुई
• गवाह केवल पुलिसकर्मी थे, स्वतंत्र गवाह नहीं
• BNSS की अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया
साथ ही, उन्होंने केंद्र सरकार की 1985 की अधिसूचना का हवाला देते हुए बताया कि 2.5% से कम कोडीन वाले उत्पाद NDPS के दायरे में नहीं आते। जब्त कफ सिरप में केवल करीब 0.2% कोडीन था।
कोर्ट का स्पष्ट रुख
अदालत ने माना कि:
• जब पदार्थ खुद NDPS एक्ट के तहत “नारकोटिक ड्रग” की श्रेणी में नहीं आता, तो मात्रा (quantity) का सवाल ही नहीं उठता
• ऐसे मामलों में NDPS नहीं, बल्कि Drugs and Cosmetics Act लागू होना चाहिए
पुलिस पर कड़ी टिप्पणी
कोर्ट ने सख्त लहजे में कहा: यह बेहद अजीब है कि कोडीन कफ सिरप के मामलों में पुलिस हर बार NDPS एक्ट लगा रही है, जबकि तय सीमा के भीतर यह ‘कंट्राबैंड’ नहीं है।
अदालत ने साफ किया कि:
• कोडीन युक्त कफ सिरप एक Schedule-H दवा है
• इसके लिए लाइसेंस और रजिस्टर मेंटेन करना जरूरी है
• नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत होनी चाहिए
पटना हाईकोर्ट की यह टिप्पणी न सिर्फ इस केस में अहम है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के तरीके पर भी बड़ा सवाल खड़ा करती है। कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिया है कि कानून के गलत इस्तेमाल पर सख्ती से नजर रखी जाएगी।