सिर्फ 1 क्लिक में मिल सकते हैं पूरे ₹15,000, जानिए कौन कर सकता है आवेदन

 
Bihar news: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य की पारंपरिक, लोक और लुप्तप्राय कलाओं को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए एक नई पहल की है। सरकार ने मुख्यमंत्री गुरु-शिष्य परंपरा योजना लागू करने का फैसला लिया है। इस योजना के तहत कला में रुचि रखने वाले युवाओं को अनुभवी कलाकारों से प्रशिक्षण दिलाया जाएगा और इसके बदले उन्हें आर्थिक मदद भी दी जाएगी।

इस योजना का मकसद यह है कि बिहार की लोक कला, संगीत, नृत्य और वादन परंपराएं नई पीढ़ी तक पहुंचें और कलाकारों को सम्मानजनक पहचान व सहारा मिल सके।

किसे कितनी मिलेगी आर्थिक सहायता?

कला एवं संस्कृति विभाग के अंतर्गत चलने वाली इस योजना में चयनित लोगों को हर महीने तय राशि दी जाएगी।
    •    गुरु (अनुभवी कलाकार) को ₹15,000 प्रति माह
    •    संगीतकार को ₹7,500 प्रति माह
    •    शिष्य (युवा कलाकार) को ₹3,000 प्रति माह

सरकार इसके लिए बजट में अलग से प्रावधान करेगी, ताकि योजना लंबे समय तक सुचारू रूप से चल सके।

कलाकारों को पेंशन का भी लाभ

राज्य सरकार कलाकारों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर भी गंभीर है। मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना के तहत पात्र कलाकारों को ₹3,000 प्रति माह पेंशन दी जाएगी। फिलहाल इस योजना में पटना, सारण, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, बांका, भोजपुर, अररिया, जहानाबाद और किशनगंज जिलों के 85 कलाकारों का चयन किया गया है।

संस्कृति और विरासत को सहेजने पर जोर

बिहार की सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने के लिए वैशाली में ₹550.48 करोड़ की लागत से बन रहे बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय-सह-स्तूप का निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य की दुर्लभ पांडुलिपियों को सुरक्षित रखने और डिजिटल रूप में आम लोगों तक पहुंचाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच एमओयू भी किया गया है।

फिल्म नीति से बढ़ेगा रचनात्मक माहौल

बिहार में पहली बार लागू की गई फिल्म पॉलिसी का असर दिखने लगा है। अब तक राज्य में 30 फिल्म, वेब सीरीज और डॉक्यूमेंट्री प्रोजेक्ट्स की शूटिंग को अनुमति दी जा चुकी है। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

अटल कला भवन का विस्तार

राज्य में 620 दर्शकों की क्षमता वाले अटल कला भवन का निर्माण भी तेजी से हो रहा है।
    •    7 जिलों में भवन बनकर तैयार
    •    लखीसराय और बांका में निर्माण जारी
    •    नवादा, अरवल, बक्सर, कैमूर, सीवान और अररिया में काम प्रगति पर

सरकार का कहना है कि इन सभी योजनाओं से बिहार की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलेगी और कलाकारों को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा।