दिन में लेथ मशीन की दुकान, रात में कारतूस की फैक्ट्री, नेपाल तक फैला था श्रीकांत का नेटवर्क
Bihar news: बिहार में कारतूस (गोली) बनाने वाली फैक्ट्री का उद्भेदन हुआ है. यह सुनकर थोड़े देर के लिए भरोसेमंद होने नहीं दे रहा है. वाक्या, लेकिन यह सत्य से परे तनको नहीं है. शायद यह खबर बिहार के इतिहास में पहली बार सामने सधे अंदाज में आया तो लोग-बाग अचंभित हो गये. पश्चिमी चम्पारण जिला मुख्यालय मोतिहारी के चकिया थाना क्षेत्र के ओझा टोला में पुलिस ने एक अवैध कारतूस (गोली) फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. यह राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) के किनारे कबाड़ की दुकान की आड़ में किराए के मकान से चल रही थी. पुलिस ने मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है. श्रीकांत सिंह पर पहले से आर्म्स एक्ट के 5 मामले दर्ज हैं.
चकिया ओझा टोला में जिस मकान में छापेमारी कर अवैध मिनी कारतूस फैक्ट्री का उद्भेदन किया गया है, वह किराए के मकान में संचालित होता था. कारतूस बनानेवाले मास्टर माइंड फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा विशुनपुर निवासी श्रीकांत सिंह ने उसे किराए पर लिया था. लोगों को उसमें कबाड़ के कारोबार होने की जानकारी थी. चकिया ओझा टोला स्थित किराए के मकान में कारतूस बनाने की फैक्ट्री की गुप्त सूचना मिली. मोतिहारी एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर छापेमारी की गई. इस दौरान कबाड़ की दुकान की आड़ में चल रहे इस कारखाने से 500 से अधिक निर्मित व अर्धनिर्मित कारतूस, हथियार, अर्द्ध निर्मित हथियार व हथियार बनानेवाले औंजार बरामद किए गए. जानकारी चकिया डीएसपी संतोष कुमार सिंह ने दी.
उन्होंने बताया कि उनके अलावा पकड़ीदयाल डीएसपी, मेहसी थाना, मधुबन, गडहिया, फेनहारा व चकिया थाना की पुलिस के साथ संयुक्त छापेमारी की गई. छापेमारी के दौरान चकिया ओझा टोला से अवैध कारतूस फैक्ट्री का उद्भेदन किया गया. इस दौरान मास्टर माइंड श्रीकांत सिंह को गिरफ्तार किया गया. पूछताछ में हुए खुलासा के आधार पर गडहिया थाना के सवंगिया गांव निवासी रामबाबू पासवान, मधुबन के पीर मोहल्ला निवासी बली आलम उर्फ मुन्ना, टोला पर निवासी इसहाक अंसारी को गिरफ्तार किया गया. छापेमारी के दौरान रामबाबू पासवान के घर से 130 पीस व उसके सहयोगी रहमत मियां के घर से 34 कारतूस बरामद किया गया.
पुलिस कार्रवाई में मिली कारतूस की अवैध मिनी फैक्ट्री का अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन भी सामने आया है. यहां से कारतूस पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण व मुजफ्फरपुर के अलावा नेपाल में बैठे अंतरराष्ट्रीय बदमाशों को भी बेचा जाता था. फैक्ट्री के मास्टरमाइंड श्रीकांत सिंह ने इसके लिए बड़ा नेटवर्क तैयार कर रखा था. वह कारतूस बनाने के लिए रसायन, धातु, बारूद व अन्य सामग्रियों को आनलाइन देश के विभिन्न हिस्सों में स्थित कंपनियों से मंगाता था. श्रीकांत ने नाइट्रिक एसिड, रेड फास्फोरस, सल्फ्यूरिक एसिड, सेलूलोज व अन्य प्रतिबंधित रसायन आनलाइन मंगाए हैं. इसके अतिरिक्त पीतल (धातु) की प्लेट, चारकोल, गन पाउडर समेत अन्य चीजें आनलाइन ही आती थी.
पुलिस यह पता लगा रही है कि किन खातों से किस पते पर ये सामान डिलीवर हो रहे थे. कंपनियां सामान बेचने के लिए निर्धारित मानकों पर चल रही थी या नहीं. खासतौर पर तब, जब बल्क में केमिकल मंगाया जा रहा हो. पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए बदमाशों के सेलफोन से कई ऐसे सुराग मिले हैं, जिनसे इनका नेपाल कनेक्शन सामने आया है. अब पुलिस बिहार के अलग-अलग जिलों के अलावा नेपाल में स्थापित बदमाशों के नेटवर्क का पता लगा रही है. एसपी की विशेष टीम गोपनीय आपरेशन पर है. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि श्रीकांत पिछले 14 वर्षों से अवैध तमंचा व कारतूस बेचने का काम करता है.
पहली बार श्रीकांत 2012 में मुजफ्फरपुर में गिरफ्तार किया गया था. जमानत पाने के बाद उसने अपना ठिकाना गृह जिले में बनाया. चकिया में चार साल पहले 4500 रुपये प्रति महीने किराए का मकान लिया था. कुछ दिन परिवार के साथ रहा था. इसके बाद अकेले रहकर कारतूस की फैक्ट्री चलाने लगा. मकान मालिक दयाशंकर ठाकुर ने आधार कार्ड लेकर किराए पर घर दिया था. किसी को संदेह नहीं हो इसके लिए बाजार में भी लेथ मशीन की दुकान लगा रखी थी. यह दुकान चकिया थाने के पास ही है. काम इस तरह से कर रहा था कि किसी को संदेह नहीं हो. जब फैक्ट्री सामने आई तो इस दुकान से भी एक कारतूस मिला. अनुमान लगाया जा रहा है कि एक कारतूस सैंपल दिखाने के लिए था.
महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय स्थित रसायन विभाग के प्राध्यापक रफीकुल इस्लाम बताते हैं कि कंसंट्रेटेड नाइट्रिक एसिड जहरीला और शक्तिशाली एसिड है. यह धातु, त्वचा और कार्बनिक पदार्थों को तेजी से गला सकता है. रेड फास्फोरस विस्फोट कराने में सक्षम होता है. एसीटोन किसी भी चीज को साफ करने में उपयोग में लाया जाता है. चारकोल बारूद में मिक्स कर देते हैं तो स्मोक ज्यादा हो जाता है. गन पाउडर कारतूस बनाने में यूज किया जाता है. यह एक तरीके से आग लगाने का काम करता है. इतने रसायन मिलाकर विस्फोट कराया जाए तो यह प्राण घातक हो सकता है.
बता दें कि बीते 19 जुलाई को चकिया एनएच किनारे ओझा टोला के पास पुलिस ने कारतूस फैक्ट्री का पर्दाफाश करते हुए मुख्य आरोपित फेनहारा थाना क्षेत्र के मड़पा विशुनपुर निवासी श्रीकांत सिंह, गड़हिया थाना क्षेत्र के सवंगिया निवासी रामबाबू पासवान, मधुबन थाना क्षेत्र के पीर मोहल्ला वार्ड संख्या-चार निवासी वसी आलम उर्फ मुन्ना एवं इसी थाना के टोला पर निवासी रहमत मियां को गिरफ्तार किया था. इनके ठिकानों से दो कट्टा, 303 पिलेट, 1063 पीस खाली कारतूस, 205 पीस कारतूस, कारतूस बनाने में उपयोग किए जानेवाले रसायन, सात अर्द्धनिर्मित मैगजीन, दो अर्द्धनिर्मित पिस्तौल का बैरल, लेथ मशीन समेत अन्य सामान जब्त किया गया था.
पूर्वी चंपारण के आरक्षी अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि कारतूस बनाने के लिए विभिन्न तरह के केमिकल व अन्य सामान आनलाइन पोर्टल पर आर्डर कर मंगाए जाते थे. जहां-जहां से सामान मंगाए गए हैं, वहां जांच की जाएगी. खासतौर पर प्रतिबंधित केमिकल की आपूर्ति करनेवाली कंपनी के खिलाफ कार्रवाई होगी. अपराधियों का अंतरराष्ट्रीय (नेपाल) कनेक्शन भी सामने आया है. सभी तथ्यों की जांच करने के साथ-साथ पुलिस आगे की छापेमारी कर रही है. पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर जिला में सक्रिय अवैध हथियार नेटवर्क से जुड़े लोगों की नींव हिला दी है. यह पहली बार है जब पुलिस को जिला में संचालित अवैध कारतूस फैक्ट्री का पर्दाफाश करने में पुलिस को सफलता मिली है. पुलिस द्वारा की गई प्रारंभिक जांच व कारतूस के अवैध धंधे के मास्टर माइंड श्रीकांत से की गई पूछताछ के बाद यह बात सामने आई है कि गिरोह का नेटवर्क उत्तर बिहार के कई जिलों में फैला है. उनमें पश्चिमी चंपारण (बेतिया) व मुजफ्फरपुर प्रमुख केंद्र के तौर पर सामने आए हैं. गिरोह से जुड़ी कई बातें सामने आई हैं, जिन्हें पुलिस गोपनीय रखते हुए आगे की छापेमारी कर रही है.
जानकार बताते हैं कि जिले में भले ही कारतूस की फैक्ट्री पहली बार मिली, लेकिन मिनी गन फैक्ट्री इससे पहले भी पकड़ी गई है. वर्ष 2020 से अबतक जिले में करीब पांच मिनी गन फैक्ट्रियों का भंडाफोड़ हो चुका है. हर बार पुलिस ने हथियार, कारतूस, निर्माण में प्रयुक्त मशीनें और औजार बरामद किए. कई तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया. हालांकि इसके बावजूद जिले में अवैध हथियारों का नेटवर्क पूरी तरह खत्म नहीं हो सका. सितंबर 2020 में पकड़ीदयाल थाना क्षेत्र के सिरहा गांव में पुलिस ने मिनी गन फैक्ट्री का उद्भेदन किया था. इस मौके से निर्मित और अर्द्धनिर्मित हथियार, हथियार बनाने के उपकरण बरामद किए गए थे तथा दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था.
28 अगस्त 2024 को चिरैया थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने एक झोपड़ी में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया. तब हथियार, कारतूस और निर्माण में प्रयुक्त उपकरण बरामद किए गए थे. इसके महज लगभग दो सप्ताह बाद 10 सितंबर 2024 को चकिया के शास्त्री नगर में किराए के मकान में चल रही दूसरी मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा हुआ था. कार्रवाई में पांच अपराधी गिरफ्तार हुए थे. तब छापेमारी में आधा दर्जन देसी पिस्टल, 73 कारतूस, मैगजीन, ग्राइंडर मशीन समेत बड़ी मात्रा में सामान बरामद किए गए थे. हालांकि गिरोह का मास्टरमाइंड तब फरार हो गया था.
अप्रैल 2025 में रक्सौल अनुमंडल के पलनवा थाना क्षेत्र के सिरिसिया गांव में मुर्गी फार्म की आड़ में संचालित मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ था. तब इस मामले में पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार किया था. छापेमारी में देसी कारबाइन, पिस्टल, बड़ी संख्या में कारतूस, अर्द्धनिर्मित हथियार और हथियार बनाने की मशीनें बरामद की गई थी. इसके बाद अगस्त 2025 में पचपकड़ी थाना क्षेत्र के देवापुर गांव में भी पुलिस ने एक अन्य मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा किया था. इस कार्रवाई में दो हथियार तस्कर गिरफ्तार किए गए थे. हथियार बनाने के उपकरण, कल-पुर्जे तथा अन्य सामग्री जब्त की गई थी.
जिले की करीब 115 किलोमीटर लंबी भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील मानी जाती है. खुली सीमा और सीमावर्ती गांवों के बीच सहज आवाजाही का फायदा उठाकर तस्कर वर्षों से शराब, मादक पदार्थ, नकली सामान और अवैध हथियारों की तस्करी की कोशिश करते रहे हैं. यह भी एक वजह है कि जिले में जब भी अवैध हथियारों की बड़ी खेप या मिनी गन फैक्ट्री का खुलासा होता है. जांच एजेंसियां उसकी कड़ियों को सीमावर्ती क्षेत्रों तक खंगालती हैं. यह पहली बार है जब जिला में कारतूस की फैक्ट्री का उद्भेदन किया गया है. पुलिस पूरे मामले की सूक्ष्मता से जांच कर रही है. गिरोह के तार कहां तक जुड़े हैं सभी तथ्यों की पड़ताल की जा रही है.
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने कारतूस फैक्ट्री के निरीक्षण व बदमाशों से पूछताछ कर इस रैकेट में शामिल अन्य बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं. सबसे अहम यह कि उसने मौत का सामान बेचने के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे मौत का सामान कारतूस बनाने के लिए फैक्ट्री लगा रखी थी. एनएच को इस कारण से चुना था ताकि आसानी से अवैध कारतूस की बिक्री एक से दूसरे जिलों में की जा सके. पुलिस की इस बड़ी कार्रवाई की सूचना पर विधि विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) की टीम ने मौके पर पहुंच नमूना संग्रह किया। इसके बाद से गिरफ्तार बदमाशों की निशानदेही पर पुलिस इस धंधे से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है.
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बताया कि छापेमारी टीम को पुरस्कृत किया जाएगा. टीम में चकिया के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार, पकड़ीदयाल के चंदन कुमार, चकिया थानाध्यक्ष धर्म प्रकाश कुमार, पुलिस निरीक्षक धीरज कुमार, मेहसी थानाध्यक्ष शानू गौरव, गड़हिया थानाध्यक्ष आदित्य कुमार, मधुबन थानाध्यक्ष प्रवीण कुमार पांडे, फेनहारा थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार समेत अन्य पुलिस अधिकारी एवं जवान शामिल थे. पुलिस अधीक्षक के अनुसार यूएपीए एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की जा रही है. गिरफ्तार बदमाशों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के साथ गिरोह से संबंधित सभी शातिरों की खोज में पुलिस की टीम लगी है. मुजफ्फरपुर व बेतिया के कई गिरोहों से कारतूस बनाकर बेचनेवालों का संबंध रहा है. इस बारे में पुलिस जानकारी जुटाने के साथ-साथ कार्रवाई कर रही है.