बिहार में हर दिन करीब 40 बच्चे लापता, बेटियों की संख्या सबसे ज्यादा; नौकरी-शादी का झांसा बन रहा बड़ा खतरा
Bihar news: बिहार में बच्चों के लापता होने के आंकड़े चिंता बढ़ा रहे हैं। पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्ष 2025 में राज्य में 14,699 बच्चों के गुम होने के मामले दर्ज किए गए। यानी औसतन हर दिन करीब 40 बच्चों के लापता होने की शिकायत पुलिस तक पहुंची। इनमें लड़कियों और किशोरियों की संख्या लड़कों की तुलना में काफी ज्यादा रही।
ताजा आंकड़ों में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 10,577 गुमशुदगी के मामले दर्ज हो चुके थे। इनमें करीब 6,700 लड़कियां शामिल थीं। इससे साफ है कि बच्चों की गुमशुदगी का मुद्दा लगातार पुलिस और बाल संरक्षण व्यवस्था के लिए चुनौती बना हुआ है।
बरामदगी में भी बेटियों की बड़ी संख्या
गुमशुदगी के मामलों के साथ पुलिस की ओर से बच्चों की तलाश और बरामदगी का अभियान भी चलाया जा रहा है। वर्ष 2025 में कुल 7,772 बच्चों को बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के अनुसार इनमें लड़कियों की संख्या काफी अधिक रही।
2026 में जून तक भी हजारों बच्चों की बरामदगी हुई। पुलिस का कहना है कि अलग-अलग मामलों में बच्चों को तलाशने के साथ उनकी पहचान और परिवार से मिलाने की प्रक्रिया जारी रहती है।
नौकरी और शादी का झांसा बन रहा खतरा
पुलिस के अनुसार, गरीब परिवारों से आने वाली किशोरियों को नौकरी या शादी का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाने के मामले गुमशुदगी के पीछे सामने आए हैं। कुछ मामलों की जांच में घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी, जबरन विवाह, यौन शोषण और भिक्षावृत्ति जैसे गंभीर हालात की बात भी सामने आई है।
यानी कई मामलों में गुमशुदगी केवल घर से दूर चले जाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसके पीछे शोषण और तस्करी से जुड़े पहलुओं की भी जांच करनी पड़ती है।
24 घंटे में FIR से बढ़े दर्ज मामले
पुलिस के मुताबिक, बच्चों के लापता होने की सूचना पर कार्रवाई के लिए 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था भी लागू है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस वजह से गुमशुदगी के दर्ज मामलों की संख्या में वृद्धि दिखाई दे सकती है।
हालांकि, शुरुआती समय में पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। बच्चों की तलाश में शुरुआती घंटे बेहद अहम माने जाते हैं और इसी दौरान तेजी से कार्रवाई की जरूरत होती है।
मिशन वात्सल्य पोर्टल से देशभर में तलाश
बिहार पुलिस अब मिशन वात्सल्य पोर्टल के जरिए दूसरे राज्यों में बरामद बच्चों की जानकारी से मिलान कर रही है। पोर्टल पर लापता बच्चों के साथ बरामद बच्चों का विवरण भी दर्ज किया जाता है, जिससे अलग-अलग राज्यों की पुलिस के बीच जानकारी साझा करने में मदद मिलती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पोर्टल के जरिए अब तक हजारों बच्चों की पहचान और तलाश की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई है। बिहार पुलिस की वेबसाइट पर भी गुमशुदा व्यक्तियों की जानकारी खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
शादी के नाम पर ले जाने वाले मामलों की भी जांच
बच्चियों और किशोरियों के गुम होने के मामलों में शादी के उद्देश्य से अपहरण की आशंका वाले मामलों का अलग से सत्यापन किया जा रहा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करती हैं कि बच्ची अपनी इच्छा से गई है या उसे बहला-फुसलाकर, दबाव बनाकर अथवा किसी अन्य तरीके से ले जाया गया।
बिहार में बच्चों की गुमशुदगी के आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि दर्ज मामलों के पीछे अलग-अलग परिस्थितियां हो सकती हैं। ऐसे में हर मामले की समय पर जांच और बच्चे की सुरक्षित बरामदगी सबसे अहम चुनौती बनी हुई है।