आरा ब्लास्ट केस में बड़ा फैसला: फांसी से बचा लम्बू शर्मा, 7 दोषी उम्रकैद से बरी; हाईकोर्ट ने सजा में किया बड़ा बदलाव
कोर्ट के फैसले में बड़ा बदलाव
चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू की खंडपीठ ने इस मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली अपीलों पर सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे अब सुनाया गया। कोर्ट ने सबूतों और दलीलों के आधार पर सजा में संशोधन करते हुए कई आरोपियों को राहत दी।
2015 का सनसनीखेज धमाका
गौरतलब है कि 23 जनवरी 2015 को आरा सिविल कोर्ट परिसर में एक महिला आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा लिया था। इस घटना में दो लोगों की मौत हुई थी और कई लोग घायल हुए थे। इस हमले का मकसद कुख्यात अपराधी लम्बू शर्मा को भगाना बताया गया था, जिसमें वह सफल भी हो गया था।
निचली अदालत ने सुनाई थी सख्त सजा
इस मामले में 2019 में निचली अदालत ने लम्बू शर्मा को फांसी की सजा सुनाई थी, जबकि अन्य आरोपियों को उम्रकैद दी गई थी। साथ ही आर्थिक दंड भी लगाया गया था।
हाईकोर्ट का नया फैसला
अब हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद:
• लम्बू शर्मा को फांसी की सजा से राहत दी
• सात आरोपियों को उम्रकैद से बरी किया
• लेकिन जेल से फरार होने के मामले में सजा बरकरार रखी
क्या है आगे का रास्ता?
इस फैसले के बाद अब मामले में कानूनी स्थिति बदल गई है। हालांकि, फरारी से जुड़े आरोप अभी भी कायम हैं, जिससे कुछ आरोपियों की मुश्किलें पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। इस फैसले ने एक बार फिर पूरे मामले को चर्चा में ला दिया है और न्यायिक प्रक्रिया पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।