गया में दलित बच्ची से दुष्कर्म के प्रयास पर उबाल: गांधी मैदान में विशाल धरना, पुलिस पर लीपापोती का आरोप; दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
Gaya News: गया जिले वजीरगंज थाना क्षेत्र में एक दलित नाबालिग बच्ची के साथ दुष्कर्म के प्रयास और पुलिस की कार्यशैली के विरोध में शनिवार को गया शहर के गांधी मैदान स्थित गेट संख्या-05 पर विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन किया। धरना में बड़ी संख्या में महिलाओं, पुरुषों और स्थानीय लोगों ने हिस्सा लेकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। यह धरना प्रदर्शन के अध्यक्षता सामाजिक कार्यकर्ता सह जन सुराज के नेता लक्ष्मण मांझी ने किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि घटना के दो महीने बीत जाने के बावजूद मुख्य आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पुलिस ने समय पर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी और मामले में कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
'शिकायत लेकर पहुंचे तो थाना से भगा दिया गया'
धरना को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता लक्ष्मण मांझी ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 1 जून 2026 को वजीरगंज थाना क्षेत्र में एक दलित बच्ची के साथ पांच युवकों ने कथित रूप से दुष्कर्म का प्रयास किया। बच्ची के बेहोश होने के बाद सभी आरोपी उसे छोड़कर फरार हो गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अगले दिन पीड़ित परिवार जब प्राथमिकी दर्ज कराने वजीरगंज थाना पहुंचा तो उनकी शिकायत लेने से इनकार कर दिया गया।
लक्ष्मण मांझी का आरोप है कि थाना में मौजूद महिला पुलिस पदाधिकारी माला कुमारी ने आवेदन को झूठा बताते हुए वापस ले जाने को कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिना प्राथमिकी दर्ज किए और बिना मेडिकल जांच कराए ही यह कह दिया गया कि बच्ची के साथ ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। इतना ही नहीं, पीड़ित परिवार पर बयान बदलने का दबाव बनाया गया और कथित रूप से झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी भी दी गई।
'2 जून को केस क्यों नहीं दर्ज हुआ?'
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि घटना झूठी थी तो 6 जून को प्राथमिकी क्यों दर्ज की गई। उनका कहना था कि अगर पुलिस ने 2 जून को ही मामला दर्ज कर लिया होता तो आरोपियों की गिरफ्तारी समय पर हो सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले मामले को दबाने का प्रयास किया गया और जब सामाजिक दबाव बढ़ा तब जाकर एफआईआर दर्ज की गई।
धरना में शामिल लोगों ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि किसी पुलिस अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो उसके खिलाफ भी विभागीय एवं कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। विशाल धरना प्रदर्शन के बाद एसएसपी कार्यालय पहुंचकर एसएसपी से मुलाकात कर एक ज्ञापन पत्र दिया गया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की गई।
'दलित होने की वजह से नहीं मिल रहा न्याय'
लक्ष्मण मांझी ने कहा कि यह केवल एक बच्ची का मामला नहीं, बल्कि पूरे दलित समाज के सम्मान और न्याय का सवाल है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब दलित समाज के लोग न्याय मांगने थाने पहुंचते हैं तो उन्हें ही डराया-धमकाया जाता है। उन्होंने कहा कि "क्या दलित होने का मतलब यह है कि हमें इंसाफ नहीं मिलेगा? आखिर किसके संरक्षण में आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए?" उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन जल्द कार्रवाई नहीं करता है तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
प्रशासन से की गई ये प्रमुख मांगें
धरना-प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कर दोषियों को जल्द गिरफ्तार किया जाए। साथ ही कथित लापरवाही बरतने वाले पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की जवाबदेही तय करना जरूरी है। धरना शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने साफ कर दिया कि यदि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय नहीं मिला और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो आंदोलन को जिलेभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।