रिशु श्री केस में बड़ा एक्शन: तीन अधिकारी गिरफ्तार, IAS संजीव हंस की तलाश तेज, जांच से मचा हड़कंप
जांच एजेंसियों का आरोप है कि ठेकेदार रिशु श्री के नेटवर्क के जरिए सरकारी परियोजनाओं में अनियमित तरीके से ठेके दिलाने और कमीशन के बदले लाभ पहुंचाने का खेल चलाया गया। मामले में कई विभागों से जुड़े अधिकारियों और ठेकेदारों की भूमिका की जांच की जा रही है।
सूत्रों के अनुसार मुमुक्षु चौधरी पर आरोप है कि नगर आयुक्त के रूप में कार्यकाल के दौरान उन्होंने कथित तौर पर कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के बदले आर्थिक लाभ प्राप्त किया। इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई में उनके ठिकानों से बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की बात भी सामने आई थी। वर्तमान में वे वित्त विभाग में संयुक्त सचिव पद पर कार्यरत थे।
वहीं पूर्व मुख्य अभियंता तारिणी दास भी जांच के दायरे में हैं। जांच एजेंसियों को संदेह है कि सरकारी ठेकों और वित्तीय लेन-देन के माध्यम से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं की गईं। इसी कड़ी में इंजीनियर उमेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मामले में आईएएस अधिकारी संजीव हंस की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है। विभिन्न एजेंसियां उनके खिलाफ प्राप्त सूचनाओं और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों का कहना है कि जांचकर्ताओं की नजर उनके कथित वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों पर भी है।
जांच के दौरान एजेंसियों को कुछ कंपनियों और वित्तीय लेन-देन के ऐसे सुराग मिले हैं, जिनके जरिए कथित तौर पर अवैध धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसी आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के पहलुओं की भी गहन जांच की जा रही है।
फिलहाल जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य अधिकारियों, ठेकेदारों और संभावित लाभार्थियों की भूमिका खंगाल रही हैं। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के बाद बिहार के प्रशासनिक और ठेकेदारी जगत में हलचल तेज हो गई है। हालांकि मामले में लगे सभी आरोप अभी जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।