पटना मेट्रो में नौकरी के नाम पर बड़ा फर्जीवाड़ा! मीठापुर में चल रहा था नकली इंटरव्यू, 10 लाख की डील, तीन शातिर गिरफ्तार

 

Bihar news: पटना मेट्रो में नौकरी दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े फर्जीवाड़े का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। मीठापुर इलाके में बुधवार को पुलिस ने छापेमारी कर फर्जी इंटरव्यू चला रहे गिरोह के तीन सदस्यों को रंगे हाथों पकड़ लिया। यह गिरोह तकनीकी अधिकारी और क्लर्क पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से लाखों रुपये की वसूली कर रहा था।

पटना सदर-1 के एएसपी के अनुसार, 28 दिसंबर को सूचना मिली थी कि मीठापुर बाइपास के पास एक फ्लैट में पटना मेट्रो के नाम पर इंटरव्यू लिया जा रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस ने पिलर संख्या-88 के पास पीएनबी बिल्डिंग स्थित फ्लैट नंबर 401 में छापा मारा। मौके पर इंटरव्यू की प्रक्रिया चल रही थी और कई अभ्यर्थी मौजूद थे।

छापेमारी के दौरान सुपौल के अखिलेश चौधरी, नवादा के दिनेश साव और सहरसा के नवनीत कुमार को गिरफ्तार किया गया। पुलिस को वहां से फर्जी प्रवेश पत्र, आवेदन से जुड़े कागजात और अन्य दस्तावेज भी मिले हैं।

पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे पहले 1179 रुपये लेकर ऑनलाइन फॉर्म भरवाते थे। इसके बाद इंटरव्यू के नाम पर 50 से 60 हजार रुपये लेकर युवाओं को पटना बुलाया जाता था। चयन का भरोसा दिलाने के बाद नौकरी के बदले 10 लाख रुपये की डील की जाती थी। अब तक अलग-अलग अभ्यर्थियों से करीब आठ लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड दानापुर का अखिलेश यादव है, जो फिलहाल फरार है। उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस के मुताबिक, सहरसा का नवनीत कुमार और सुपौल का अखिलेश चौधरी इंटरव्यू लेते थे। नवनीत पहले साइबर कैफे चलाता था और बाद में इस फर्जी रैकेट से जुड़ गया।

इस मामले में जक्कनपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने संकेत दिए हैं कि गिरोह में और भी लोग शामिल हो सकते हैं, इसलिए गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि किसी भी नौकरी के लिए पैसे मांगने वालों से सतर्क रहें और आधिकारिक सूचना की ही पुष्टि करें।