Chandan Vs Sheru: चंदन-शेरू की जोड़ी टूटी इश्क में, गोली बनी फैसले की जुबान, जानिए चंदन मिश्रा हत्याकांड की इनसाइड स्टोरी

 

Bihar, बक्सर की गलियों से निकलकर पटना के अस्पताल तक पहुंची एक दुश्मनी ने पूरे बिहार को हिला कर रख दिया है। चंदन मिश्रा की हत्या कोई आम वारदात नहीं थी। यह उस साजिश की परिणति थी, जिसकी जड़ें गहरी थीं और जिनमें शामिल थे दोस्ती, इश्क, गैंगवार और अंत में खूनी बदला।

कभी जय-वीरू थे चंदन और शेरू

बक्सर के अंडरवर्ल्ड में एक दौर ऐसा भी था जब दो नामों का खौफ हर गली-कूचे में देखा जाता था। चंदन मिश्रा और शेरू सिंह उर्फ ओंकारनाथ। दोनों एक बाइक पर सवार होकर जुर्म की दुनिया में उतरे थे। महज़ 20 साल की उम्र में रंगदारी के लिए 8 हत्याओं को अंजाम देकर उन्होंने ‘बक्सर के बादशाह’ जैसी पहचान बना ली थी।

फिर आई दरार, जब दिल हार बैठा शेरू

यह सब तब बदल गया जब शेरू की नजर चंदन की बहन पर जा टिकी। राजपूत-ब्राह्मण की मोहब्बत ना समाज को रास आई, ना ही चंदन को। इश्क की गंध जब मोहल्लों में फैलने लगी, तो दोस्ती की नींव चरमराने लगी। चंदन ने इसे अपनी इज़्ज़त पर चोट माना। यहीं से शुरुआत हुई एक ऐसी दुश्मनी की, जिसने अंततः मौत का रास्ता चुना।

हत्या की स्क्रिप्ट, जेल के भीतर लिखी गई पटकथा

14 जुलाई 2025, पटना के पारस अस्पताल में, दिनदहाड़े पांच हथियारबंद शूटर दूसरी मंज़िल पर स्थित कमरे नंबर 209 में दाखिल होते हैं। जहां इलाज के लिए भर्ती था कुख्यात चंदन मिश्रा। गोलियां चलती हैं, शोर नहीं होता है, सब कुछ फिल्मी अंदाज में खत्म होता है। चंदन की मौत की खबर जैसे ही बाहर आती है, बिहार पुलिस में हड़कंप मच जाता है।

पुलिस जांच: धागा खींचा तो बंगाल के जेल तक पहुंचा

जांच जैसे-जैसे गहराती गई, वैसे-वैसे खुलासे चौंकाते गए। हत्या की साजिश रची गई थी बिहार की जेल से लेकिन इसके पीछे का मास्टरमाइंड बंगाल की पुरुलिया जेल में बंद शेरू निकला। पुलिस ने जब शेरू से पूछताछ की तो उसने हत्या की पूरी प्लानिंग कबूल की। अब पुलिस की नजर शेरू के शागिर्द पर है, जो इस वक्त बिहार की जेल में बंद है।

Chandan Vs Sheru: एक कहानी, कई परतें

यह महज़ एक मर्डर केस नहीं था। यह उन दो दोस्तों की कहानी थी, जो साथ चले थे जुर्म में, पर खत्म हुए खून में। एक कब्र में उतरा, दूसरा अब कानून के शिकंजे में है। बक्सर की गलियों से निकली यह कहानी बताती है कि अपराध की दुनिया में दोस्ती नहीं, चालें चलती हैं। जहां इश्क भी जानलेवा बन सकता है और दोस्त ही सबसे बड़ा दुश्मन।