भागलपुर में बेड पर जिंदगी और मौत के बीच जूझती बेटी, बचाने के लिए बाप ने बेच दिया घर-बार

 

Bhagalpur News: बिहार के भागलपुर जिला के कहलगांव प्रखंड के एकडारा गांव में रहने वाले राजमिस्त्री नियुल हक की कहानी एक संघर्ष की दास्तान है। उनके 16 वर्षीय पुत्री मनकसा खातून, जो इंटर की छात्रा हैं, पिछले छह महीनों से जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही हैं। पिता ने अपनी बेटी के इलाज में अब तक लगभग 27 लाख रुपये खर्च कर दिए हैं। इसके बावजूद, परिवार 13 लाख रुपये के कर्ज में डूब चुका है और उन्होंने अपनी 10 कट्ठा पुस्तैनी जमीन भी बेच दी है।

मनकसा के बड़े भाई ने अपनी पढ़ाई छोड़कर मजदूरी शुरू कर दी है ताकि बहन का इलाज जारी रह सके। वह बीए में पढ़ाई कर रहा था, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसने काम करना शुरू किया। छोटा भाई अभी नौवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। मनकसा का इलाज वर्तमान में जवाहरलाल मेडिकल कॉलेज एण्ड अस्पताल, भागलपुर के एचयूडी वार्ड में चल रहा है, जहां उसे पाइप के माध्यम से लिक्विड दिया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार, उसके ब्रेन में सिकुड़न हो रही है।

मनकसा की यह स्थिति कैसे हुई, यह भी एक दुखद कहानी है। छह महीने पहले, जब वह घर में पोंछा लगा रही थी, अचानक उसका पैर फिसल गया और वह गिर गई। गिरते समय उसकी गर्दन चौकी से टकरा गई, जिससे वह बेहोश हो गई। उसे भागलपुर के एक निजी क्लीनिक में भर्ती कराया गया, जहां लाखों रुपये खर्च हुए। बाद में, बेहतर इलाज के लिए उसे सिलीगुड़ी रेफर किया गया, जहां परिवार को प्रतिदिन 25 से 30 हजार रुपये खर्च करने पड़े। इलाज के लिए परिवार ने ग्रामीणों, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से 13 लाख रुपये का कर्ज लिया।

सिलीगुड़ी में भी उसकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ, जिसके बाद पिता ने उसे वापस भागलपुर लाकर एक अन्य चिकित्सक से इलाज कराया। कुछ दिन बाद, उसे फिर से जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एण्ड अस्पताल रेफर कर दिया गया। पिता नियुल हक ने बताया कि उनकी पुत्री मनकसा ने बिहार बोर्ड और मदरसा दोनों जगहों पर मैट्रिक परीक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया था। वह इंटर द्वितीय वर्ष की छात्रा थी और पढ़ाई करके अधिकारी बनने का सपना देखती थी। लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था। नियुल हक एक राजमिस्त्री हैं और अपने परिवार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।