नरकटियागंज में ऑपरेशन के बाद प्रसूता की मौत से बवाल, निजी अस्पताल पर गंभीर आरोप; शव रखकर सड़क पर उतरे परिजन

 

Bihar news: पश्चिम चंपारण के नरकटियागंज में एक निजी अस्पताल में ऑपरेशन के दौरान प्रसूता की मौत के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल की इमरजेंसी के सामने शव रखकर जमकर प्रदर्शन किया और इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए चिकित्सक की गिरफ्तारी की मांग पर अड़ गए। मामला बढ़ता देख मौके पर पहुंची शिकारपुर थाना पुलिस हालात संभालने में जुटी रही।

घटना नरकटियागंज नगर के कृषि बाजार रोड स्थित एक निजी अस्पताल की है। मृतका की पहचान चतुर्भुजवा गांव निवासी छोटू कुमार की 22 वर्षीय पत्नी प्रियंका देवी के रूप में हुई है। परिजनों का कहना है कि प्रियंका को 2 जनवरी को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां सिजेरियन ऑपरेशन के बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया। शुरुआत में स्थिति सामान्य बताई गई, लेकिन 4 जनवरी को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी।

परिजनों के अनुसार, हालत गंभीर होने पर अस्पताल के संचालक डॉक्टर सद्दाम हुसैन ने उसे बेतिया के नारायण हॉस्पिटल रेफर कर दिया। वहां से भी सुधार नहीं होने पर परिजन उसे गोरखपुर के गोरक्ष हॉस्पिटल लेकर गए, जहां इलाज के दौरान प्रियंका ने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिजन गुस्से में अस्पताल पहुंच गए और डॉक्टर पर लापरवाही के साथ गंभीर आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

मृतका के चाचा हरेंद्र साह ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर चूक हुई है। परिजनों ने यहां तक आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन सच्चाई छिपाने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि अस्पताल द्वारा यह सूचना दी जा रही थी कि चिकित्सक 5 से 8 जनवरी तक उपलब्ध नहीं रहेंगे, जिसे परिजनों ने मौके पर ही फाड़कर विरोध जताया।

हंगामे की सूचना पर शिकारपुर थानाध्यक्ष ज्वाला सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने परिजनों को समझाया और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बेतिया भेज दिया। इस दौरान अस्पताल परिसर और आसपास के इलाके में तनाव का माहौल बना रहा।

इसी बीच बेतिया दौरे पर आई अनुसूचित जाति/जनजाति आयोग की सदस्य प्रेमशिला गुप्ता भी मामले की जानकारी मिलने पर नरकटियागंज पहुंचीं। उन्होंने बताया कि मृतका अनुसूचित जाति समुदाय से थी और पूरे मामले की गंभीरता से जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने पर संबंधित डॉक्टर की गिरफ्तारी होगी और मृतका के परिजनों को सरकार की ओर से मिलने वाली हर संभव सहायता दिलाई जाएगी। साथ ही जिला प्रशासन से बात कर नरकटियागंज में चल रहे फर्जी डॉक्टरों को चिन्हित कर सख्त कार्रवाई के निर्देश देने की बात भी कही।

फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।