थाने में दरिंदगी की हद: चोरी के शक में युवक के प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल डालने का दावा
Bihar news: बिहार के समस्तीपुर जिले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ताजपुर थाना में चोरी के शक में हिरासत में लिए गए एक युवक के साथ कथित तौर पर अमानवीय व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित युवक के आरोपों के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी ने थानाध्यक्ष समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, 28 दिसंबर की रात ताजपुर थाना क्षेत्र के नीम चौक स्थित सोनी फैंसी ज्वेलर्स से करीब 28 किलो चांदी और 60 ग्राम सोने की चोरी हुई थी। इस मामले में दुकानदार जकी अहमद ने अपने कर्मचारी मनीष कुमार पर संदेह जताया था। आरोप है कि पहले दुकानदार ने मनीष के साथ मारपीट की और बाद में उसे पुलिस के हवाले कर दिया।
पीड़ित मनीष कुमार का आरोप है कि 31 दिसंबर से 4 जनवरी तक उसे ताजपुर थाना की हिरासत में रखा गया। इस दौरान उससे जबरन चोरी कबूल कराने के लिए कथित तौर पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। मनीष का दावा है कि पूछताछ के दौरान उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई और उसके प्राइवेट पार्ट में पेट्रोल तक डाला गया। उसकी हालत बिगड़ने पर 5 जनवरी को उसे बॉन्ड पर छोड़ा गया, जिसके बाद परिजनों ने उसे सदर अस्पताल में भर्ती कराया।
पीड़ित की मां संगीता देवी ने पुलिस पर और भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि मनीष के पिता संजय पोद्दार और उसकी पत्नी को भी तीन दिनों तक थाने में अवैध रूप से बैठाए रखा गया। घर की तलाशी के दौरान कुछ भी बरामद नहीं हुआ, इसके बावजूद परिजनों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। उनका आरोप है कि मनीष के पिता और पत्नी को छोड़ने के बदले पुलिस ने 50 हजार रुपये की मांग की और पैसे लेने के बाद ही उन्हें छोड़ा गया।
मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। विरोध को देखते हुए समस्तीपुर एसपी अरविंद प्रताप सिंह ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए एसपी ने ताजपुर थानाध्यक्ष शंकर शरण दास, अनुसंधानकर्ता राजवंश कुमार और सिपाही राहुल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
एसपी ने बताया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस हिरासत में होने वाले अत्याचारों को लेकर प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।