रीतलाल यादव को हाईकोर्ट से झटका, रंगदारी मामले में जमानत याचिका खारिज

 

Bihar news: दानापुर के पूर्व राजद विधायक रीतलाल यादव को खगौल थाना कांड संख्या 129/2025 में पटना हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। जस्टिस अशोक कुमार पांडेय की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने आदेश में आरोपों की गंभीरता और उनके बताए गए आपराधिक इतिहास को जमानत देने के खिलाफ महत्वपूर्ण आधार माना।

निर्माण कंपनी से रंगदारी मांगने का आरोप

मामला खगौल-दानापुर के कोठवा गांव में एक निर्माण परियोजना से जुड़ा है। कोर्ट के समक्ष रखे गए मामले के अनुसार, भवन निर्माण कंपनी जेनेक्स इको इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2023 में वहां प्रोजेक्ट शुरू किया था।

आरोप है कि रीतलाल यादव के भाई पिंकू यादव ने कंपनी को निर्माण सामग्री खरीदने का सुझाव दिया। इसके बाद कथित तौर पर 33 लाख रुपये की मांग की गई, जबकि सामग्री की कीमत करीब 19 लाख रुपये बताई गई।

मामले में आगे आरोप लगाया गया कि वर्ष 2024 में रीतलाल यादव ने कंपनी के एक साझेदार को फोन कर मुलाकात के लिए बुलाया। इसके बाद उनके आवास पर 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक, 4 लाख रुपये दिए गए और 30 लाख रुपये का लिखित नोट भी तैयार कराया गया। इसके बाद कथित तौर पर धमकी भरे फोन आने लगे। विधायक के साले पर भी 10 लाख रुपये जबरन वसूलने का आरोप लगाया गया है।

शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से यह भी दावा किया गया कि रंगदारी मांगने से संबंधित बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है।

पूर्व विधायक ने आरोपों से किया इनकार

रीतलाल यादव की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि वह मामले में निर्दोष हैं। उनकी ओर से यह भी कहा गया कि निर्माण सामग्री के कारोबार से उनका कोई संबंध नहीं है। बचाव पक्ष ने प्राथमिकी दर्ज होने में करीब दो साल की देरी का मुद्दा भी उठाया और आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्हें राजनीतिक कारणों से फंसाया गया है।

सरकार ने आपराधिक इतिहास का दिया हवाला

जमानत का विरोध करते हुए राज्य के महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि रीतलाल यादव के खिलाफ 38 आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या समेत गंभीर प्रकृति के मामले भी शामिल होने की बात अदालत के समक्ष रखी गई।

सरकार की ओर से यह भी दलील दी गई कि कई मामलों में गवाहों के डर के कारण अदालत में बयान नहीं देने से आरोपी को बरी होने का लाभ मिलता रहा है। राज्य की ओर से मौजूदा मामले को संगठित अपराध से जुड़ा बताया गया।

‘जमानत नियम, जेल अपवाद’, फिर भी राहत नहीं

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 18 पन्नों का आदेश जारी किया। अदालत ने अपने आदेश में सामान्य कानूनी सिद्धांत का उल्लेख करते हुए कहा कि जमानत नियम है और जेल अपवाद, लेकिन हर मामले में आरोपों की प्रकृति और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

कोर्ट ने आरोपों की गंभीरता और रीतलाल यादव के आपराधिक इतिहास को देखते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद खगौल थाना कांड में पूर्व विधायक को न्यायिक राहत नहीं मिल सकी है।