34 साल बाद आया इंसाफ! जानलेवा हमले के मामले में 85 वर्षीय बुजुर्ग समेत 5 दोषियों को सजा
लोक अभियोजक श्याम बाबू राय ने बताया कि यह मामला वर्ष 1992 का है। जुरावनपुर थाना क्षेत्र में एक व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ घर पर बैठे थे, तभी उन्हें जानकारी मिली कि घर जाने वाले रास्ते में कुछ लोग शीशे के टुकड़े बिछा रहे हैं। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपियों ने उन पर गोली चला दी, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
घटना के बाद पुलिस जांच हुई और अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया गया। इस मामले में कुल नौ आरोपी थे, लेकिन ट्रायल के दौरान चार आरोपियों की मौत हो गई। शेष पांच आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलता रहा।
लोक अभियोजक ने बताया कि आरोपियों की ओर से ट्रायल को लंबा खींचने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत में मेडिकल रिपोर्ट, गवाहों और अन्य साक्ष्यों को मजबूती से पेश किया गया। सभी तथ्यों पर सुनवाई के बाद अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया।
उन्होंने बताया कि 85 वर्षीय दीपा राय पहले से जमानत पर थे और उनकी उम्र को देखते हुए अदालत ने उन्हें 3 साल की सजा सुनाते हुए प्रोबेशन का लाभ दिया है, जिससे उन्हें जेल नहीं जाना पड़ेगा। वहीं बाकी चार दोषियों को 10-10 वर्ष की सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
करीब साढ़े तीन दशक बाद आए इस फैसले को लेकर इलाके में चर्चा का माहौल है। लोक अभियोजक ने कहा कि यह फैसला समाज और आपराधिक मानसिकता रखने वाले लोगों के लिए बड़ा संदेश है कि अपराध करने के बाद चाहे कितनी भी कोशिश कर ली जाए, कानून के हाथों से बचा नहीं जा सकता।