नीट छात्रा रेप–मौत केस: एक रात नहीं, पूरी साज़िश की जांच, 59 बिंदुओं पर CID-SIT की पड़ताल

 

Patna crime news: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की रेप के बाद मौत के मामले ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। यह केस अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक संभावित साज़िश के रूप में देखा जा रहा है। पटना पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) और CID मिलकर इस मामले की परत-दर-परत जांच कर रही है। CID ने जांच के लिए 59 बिंदुओं की विशेष गाइडलाइन जारी की है, जिससे साफ है कि जांच का दायरा हॉस्टल तक सीमित नहीं, बल्कि परिवार, जहानाबाद कनेक्शन और डिजिटल साक्ष्यों तक फैला हुआ है।

5 जनवरी की रात से 6 जनवरी दोपहर तक फोकस
जांच का सबसे अहम और संवेदनशील समय 5 जनवरी की रात 9:30 बजे से 6 जनवरी की दोपहर 2 बजे तक माना जा रहा है। पुलिस के मुताबिक इसी दौरान हॉस्टल के अंदर संदिग्ध गतिविधियां हुईं। SIT और CID की टीम ने हॉस्टल जाकर कमरों की बनावट, आने-जाने के रास्ते और संभावित सीन को बारीकी से जांचा।

FSL रिपोर्ट से खुलासा, युवकों पर सिमटी जांच
फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट ने मामले को नया मोड़ दिया है। छात्रा के कपड़ों पर मिले स्पर्म सैंपल के आधार पर आरोपी की उम्र 18 से 21 साल के बीच आंकी गई है। इसके बाद जांच चार-पांच ऐसे युवकों पर केंद्रित हो गई है, जिनकी उम्र, लोकेशन और संपर्क इस दायरे में आते हैं। इन सभी की कॉल डिटेल, लोकेशन और हॉस्टल से जुड़ी गतिविधियों की जांच की जा रही है।

दवाओं को लेकर गहराया शक
CID को आशंका है कि छात्रा को हॉस्टल में एंटी-डिप्रेसेंट या सेडेटिव दवाएं दी गईं। कमरे से तीन खाली दवा स्ट्रिप मिलने की बात सामने आई, लेकिन पुलिस को सिर्फ एक स्ट्रिप सौंपी गई। नाबालिग छात्रा के पास इतनी दवाएं कैसे पहुंचीं, वार्डन ने इन्हें परिजनों को क्यों सौंपा और पुलिस को समय पर सूचना क्यों नहीं दी ये सवाल जांच के केंद्र में हैं।

CCTV नहीं, प्रक्रिया में भी खामियां
हॉस्टल में CCTV कैमरे न होना, दरवाजा तोड़ने से पहले मजिस्ट्रेट या प्रशासनिक अधिकारी की मौजूदगी न होना और हॉस्टल मालिक की गिरफ्तारी के बावजूद अन्य जिम्मेदारों पर कार्रवाई न होना जांच एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। यह भी जांच की जा रही है कि क्या पहले भी ऐसी घटनाओं को दबाया गया था।

26 दिसंबर का फैमिली विजिट भी शक के घेरे में
26 दिसंबर को छात्रा के पूरे परिवार का अचानक हॉस्टल आकर उसे घर ले जाना भी सवाल खड़े कर रहा है। सामान्य तौर पर छात्राएं अकेले आती-जाती हैं। उस दौरान छात्रा की मानसिक स्थिति, घर जाने-लौटने के CCTV फुटेज और अगले 9 दिनों के व्यवहार की जांच की जा रही है।

जहानाबाद और डिजिटल कनेक्शन की जांच
26 दिसंबर से 5 जनवरी के बीच छात्रा कहां गई, किससे मिली और उसकी मानसिक हालत कैसी थी इसके लिए गांव के चौकीदार, पड़ोसियों और रिश्तेदारों से पूछताछ हो रही है। साथ ही मोबाइल सर्च हिस्ट्री, सोशल मीडिया चैट, मेडिकल स्टोर रिकॉर्ड और स्टेशन के CCTV फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं। नींद की गोलियों से जुड़े सर्च ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पलटा पूरा मामला
शुरुआत में इसे दवा ओवरडोज और सुसाइड का मामला बताया गया, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर संघर्ष के निशान, चोटें, हेड इंजरी और यौन हमले के स्पष्ट संकेत मिले। इसके बाद पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे। रिपोर्ट को सेकेंड ओपिनियन के लिए AIIMS पटना भेजा गया है।

पिता का आरोप और गिरफ्तारी
छात्रा के पिता ने इसे हत्या बताते हुए हॉस्टल प्रबंधन पर सबूत मिटाने और CCTV डिलीट करने का आरोप लगाया है। सबूत छेड़छाड़ के आरोप में हॉस्टल मालिक मनीष कुमार रंजन की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन अब तक अन्य संचालकों पर कार्रवाई न होने से सवाल उठ रहे हैं।

27 दिसंबर से 11 जनवरी तक की पूरी टाइमलाइन तैयार
SIT ने 27 दिसंबर से 11 जनवरी तक की पूरी घटनाक्रम की टाइमलाइन तैयार कर ली है, जिसे कोर्ट में पेश किया जाएगा। AIIMS की टीम द्वारा सीन रीक्रिएशन के बाद अब जांच इस सवाल पर टिक गई है। यह सिर्फ एक अपराध था या कई लोगों की मिलीभगत से रची गई सुनियोजित साज़िश, जिसके कुछ चेहरे अब भी सामने आना बाकी हैं।