NEET छात्रा मौत मामला पहुंचा पटना हाईकोर्ट, जांच की निगरानी को लेकर दाखिल हुई जनहित याचिका
Bihar news: नीट की तैयारी कर रही छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इस मामले में पटना हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है, जिसमें पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की गई है। यह याचिका पटना हाईकोर्ट की अधिवक्ता अलका वर्मा के माध्यम से सुषमा कुमारी द्वारा दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि यह मामला एक छात्रा की असामयिक और संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जो नीट जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा की तैयारी कर रही थी। ऐसे में यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है, जिस पर अदालत के हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
जांच में पारदर्शिता की मांग
जनहित याचिका में मांग की गई है कि इस पूरे मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय तरीके से कराई जाए। याचिकाकर्ता का कहना है कि घटना के इतने दिनों बाद भी अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है, जिससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
जहानाबाद की रहने वाली थी छात्रा
बताया गया है कि मृत छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी। वह 5 जनवरी 2026 को अपने घर से पटना स्थित हॉस्टल लौटी थी। 6 जनवरी की सुबह उसे बेहोशी की हालत में पाया गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान 11 जनवरी 2026 को छात्रा की मौत हो गई।
शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को नींद की गोलियों के ओवरडोज से जुड़ा बताया था, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद बलात्कार और जबरदस्ती की आशंका जताई गई। इसके बाद पुलिस को जांच की दिशा बदलनी पड़ी।
हॉस्टल व्यवस्था पर भी उठे सवाल
जनहित याचिका में हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मांग की गई है कि सभी छात्रावासों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, स्टाफ का पुलिस सत्यापन अनिवार्य किया जाए, मेडिकल सुविधा उपलब्ध कराई जाए और महिला वार्डन की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
इसके साथ ही हॉस्टलों की निगरानी के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी गठित करने और समय-समय पर सर्वे कराने की मांग भी की गई है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि हॉस्टल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के बयान आपस में मेल नहीं खाते, जिससे संदेह और गहरा गया है।
हाईकोर्ट से जांच की निगरानी की अपील
याचिकाकर्ता ने पटना हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि वह इस पूरे मामले की जांच की निगरानी करे, ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो। साथ ही राज्य के छात्रावासों की व्यवस्था सुधारने के लिए भी दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है।
अब इस मामले पर पटना हाईकोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला न केवल इस केस, बल्कि राज्य में छात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी अहम माना जा रहा है।