भरत तिवारी एनकाउंटर में नया मोड़: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में 5 गोलियों का खुलासा, पुलिस की थ्योरी पर उठे सवाल
Bihar news: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया है। रिपोर्ट में भरत तिवारी के शरीर में पांच गोलियां लगने की पुष्टि होने के बाद पुलिस के शुरुआती दावों पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस मामले को लेकर अब सियासी और कानूनी बहस भी तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, एनकाउंटर के बाद पुलिस की ओर से दो से तीन गोलियां लगने की बात कही गई थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुल पांच गोलियां लगने की पुष्टि हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, भरत तिवारी को दो गोलियां बाईं जांघ, दो दाहिनी जांघ और एक गोली बाएं पैर के पिछले हिस्से में लगी थी।
मामले में भोजपुर पुलिस ने घटना के सातवें दिन तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा समेत अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। हालांकि एफआईआर दर्ज होने के चार दिन बाद भी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल राजेश मालाकार को आरा पुलिस मुख्यालय और राजेश कुमार शर्मा को पटना पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया गया है। दोनों अधिकारी निलंबित हैं और जांच में सहयोग कर रहे हैं। पुलिस का कहना है कि चूंकि आरोपी जांच में सहयोग कर रहे हैं और उनके फरार होने की आशंका नहीं है, इसलिए गिरफ्तारी आवश्यक नहीं समझी गई है।
कानूनी विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल एफआईआर दर्ज हो जाने से गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं हो जाती। यदि आरोपी के फरार होने, साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना नहीं हो, तो जांच एजेंसी गिरफ्तारी के बजाय अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का सहारा ले सकती है।
दूसरी ओर, भरत तिवारी के परिजनों ने पूरी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे सुनियोजित साजिश बताया है। भरत की भाभी सुमन तिवारी ने आरोप लगाया है कि मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो रही है। परिवार अब भोजपुर के एसपी और एसडीएम के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में है। साथ ही उन्होंने मांग की है कि मामले की जांच किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के बजाय हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए।
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि परिवार शुरू से ही पांच गोलियां चलने का दावा कर रहा था और अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने उनके दावों को मजबूती दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि घटना की सच्चाई को दबाने की कोशिश की गई।
वहीं, सदर अस्पताल के तत्कालीन ड्यूटी डॉक्टर के कथित बयान में भी चार से पांच गोलियां लगने की बात सामने आई थी। डॉक्टर के अनुसार, भरत की स्थिति गंभीर थी, जिसके बाद उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
फिलहाल इस पूरे मामले की जांच पटना हाईकोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले न्यायिक आयोग द्वारा की जा रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है और अब सभी की नजर न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है।