पटना में ऑनलाइन निवेश के नाम पर 95 लाख की ठगी, रिटायर्ड मैनेजर को फर्जी ट्रेडिंग जाल में फंसाया

 

Bihar news: राजधानी पटना में ऑनलाइन निवेश के नाम पर बड़ी ठगी का मामला सामने आया है, जिसमें एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को करीब 95 लाख रुपये का चूना लगाया गया। इस मामले ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के बढ़ते नेटवर्क और उनकी चालाकी को उजागर कर दिया है। पीड़ित ने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।  

शिकायत के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के गृह ऋण शाखा के सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक अमरेंद्र कुमार सिन्हा को यह ठगी का शिकार बनाया गया। वे 31 अगस्त 2024 को सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे और उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद एकमुश्त अच्छी राशि प्राप्त हुई थी। इस राशि को सुरक्षित और लाभकारी स्थान पर निवेश करने की इच्छा ने उन्हें साइबर अपराधियों के जाल में फंसा दिया। बताया गया है कि सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक माध्यमों पर सक्रिय हो गए थे। इसी दौरान उन्हें “वेपलोग” नामक एक विज्ञापन दिखाई दिया, जिस पर क्लिक करने के बाद उनकी मुलाकात साक्षी अग्रवाल नाम की एक महिला से हुई। उक्त महिला ने खुद को मुंबई स्थित एक निर्माण कंपनी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी बताया और धीरे-धीरे विश्वास जीत लिया। दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और आपसी विश्वास कायम करने के लिए व्यक्तिगत जानकारी, पहचान पत्र और तस्वीरें साझा की गईं। 

इसके बाद महिला ने उन्हें “पोलियस फाइनेंस पिक” नामक एक ट्रेडिंग मंच में निवेश करने की सलाह दी। शुरुआत में अमरेंद्र कुमार सिन्हा ने 43 हजार रुपये निवेश किए और कुछ दिनों बाद उन्हें छोटी राशि की निकासी भी कराई गई, जिससे उनका भरोसा और मजबूत हो गया। इसके बाद उन्होंने लगातार निवेश करना शुरू कर दिया और उनके खाते में दिख रही संपत्ति का मूल्य बढ़कर लगभग साढ़े तीन लाख रुपये तक पहुंच गया। जब उन्होंने बड़ी राशि निकालने का प्रयास किया, तो उन्हें बताया गया कि पहले विनिमय और कमीशन के रूप में भारी रकम जमा करनी होगी। इस प्रकार अलग-अलग कारणों से उनसे लगातार पैसे जमा कराए गए। 

आरोप है कि आरोपी महिला ने कई बार वीडियो कॉल के माध्यम से भी संपर्क किया, जिससे पीड़ित को शक न हो। साथ ही उसने अपने खाते में भी निवेश दिखाकर भरोसा बढ़ाया। बाद में सुरक्षा जमा, लेखा परीक्षण शुल्क और अन्य शुल्कों के नाम पर बड़ी रकम मांगी गई। जब पीड़ित ने असमर्थता जताई, तब भी उसे तरह-तरह के बहाने बनाकर पैसे जमा करने के लिए प्रेरित किया गया। घटना के क्रम में पीड़ित ने कई किश्तों में बड़ी राशि जमा की, लेकिन अंततः जब निकासी संभव नहीं हुई और आरोपी से संपर्क टूट गया, तब उन्हें ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई। 

इस संबंध में साइबर थाना के प्रभारी नीतिश चंद्र धारिया ने बताया कि निवेश के नाम पर ठगी का मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है। उन्होंने आम नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी निवेश से पहले संबंधित कंपनी की पूरी जानकारी अवश्य लें। उन्होंने यह भी कहा कि कोई भी वैध और पंजीकृत कंपनी अलग-अलग खातों में पैसे जमा करने को नहीं कहती है। यदि कोई व्यक्ति निवेश के नाम पर कई खातों के माध्यम से पैसे मांगता है, तो यह संदिग्ध गतिविधि हो सकती है और ऐसे मामलों से तुरंत दूरी बनानी चाहिए। 

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर ठगी के मामलों में भी तेजी आई है। ऐसे में लोगों को अधिक सतर्क रहने और अनजान प्लेटफॉर्म या व्यक्तियों पर भरोसा करने से बचने की जरूरत है। यह घटना एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आई है, जो बताती है कि लालच और जल्द लाभ की चाहत किस तरह लोगों को बड़े आर्थिक नुकसान में डाल सकती है।