मुजफ्फरपुर में सब्जियों की ‘फर्जी ताजगी’ का खेल? खराब सब्जियों पर केमिकल लगाने के आरोप से मचा हड़कंप
Bihar news: बाजार में चमकदार और हरी-भरी सब्जियां देखकर ग्राहक अक्सर उन्हें ताजा और अच्छी गुणवत्ता वाला मान लेते हैं। लेकिन अगर यही ताजगी महज दिखावा हो और खराब हो चुकी सब्जियों को किसी रासायनिक घोल की मदद से फिर से ताजा जैसा दिखाने की कोशिश की जा रही हो, तो मामला बेहद गंभीर हो सकता है।
मुजफ्फरपुर में सब्जियों को लेकर सामने आए एक कथित मामले ने बाजार में बिकने वाली सब्जियों की गुणवत्ता और उनकी जांच व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा किया जा रहा है कि खराब हो चुकी सब्जियों को केमिकलयुक्त घोल में डालकर उनका रंग-रूप बदलने और उन्हें ताजा जैसा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
कैमरे में कैद होने का दावा, जांच के बाद खुलेगा सच
शहर के अलग-अलग बाजारों में सब्जियों की गुणवत्ता को लेकर पहले भी लोगों के बीच सवाल उठते रहे हैं। इसी तरह की शिकायतों और चर्चाओं के बाद कई दिनों तक पड़ताल किए जाने का दावा किया गया।
पड़ताल के दौरान सामने आए कथित दृश्यों में खराब सब्जियों को किसी घोल में डालते हुए दिखाए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि प्रक्रिया के बाद इन्हीं सब्जियों को बाजार में दोबारा बिक्री के लिए लाया जाता है।
हालांकि, घोल में किस रसायन का इस्तेमाल किया गया, वह प्रतिबंधित है या नहीं और इससे स्वास्थ्य पर कितना असर पड़ सकता है, इसकी पुष्टि फिलहाल वैज्ञानिक जांच के बिना नहीं की जा सकती।
ग्राहक को कैसे पता चलेगा कि सब्जी वास्तव में ताजी है?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल उपभोक्ता की सुरक्षा को लेकर है। ग्राहक सब्जी का रंग, चमक और बाहरी रूप देखकर उसे खरीदता है। अगर किसी प्रक्रिया के जरिए खराब सब्जी को ताजा जैसा दिखाया जा रहा है, तो उपभोक्ता के पास उसकी वास्तविक गुणवत्ता पहचानने का कोई आसान तरीका नहीं रह जाता।
खासकर ऐसी स्थिति में जब सब्जी खाने के लिए सीधे घर पहुंचती है, संभावित रासायनिक अवशेषों का सवाल भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हालांकि, इससे होने वाले स्वास्थ्य नुकसान को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले प्रयोगशाला जांच जरूरी होगी।
फूड सेफ्टी विभाग की निगरानी पर भी सवाल
मुजफ्फरपुर में सामने आए इस दावे ने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल है कि बाजारों में बिकने वाली सब्जियों की गुणवत्ता की नियमित जांच कितनी प्रभावी तरीके से होती है।
क्या संदिग्ध सब्जियों के नमूने लेकर उनकी जांच की जाती है? अगर ऐसी गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं तो निगरानी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? ये ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब संबंधित विभाग की जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
जांच हुई तो सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पूरे मामले में सबसे जरूरी कदम संदिग्ध सब्जियों के नमूने लेकर वैज्ञानिक और प्रयोगशाला जांच कराना है। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि वास्तव में किसी रसायन का इस्तेमाल हुआ या नहीं और अगर हुआ तो वह स्वास्थ्य के लिए कितना जोखिम भरा है।
अगर जांच में प्रतिबंधित या हानिकारक रसायन के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए।
क्योंकि मामला सिर्फ बाजार में बिक रही कुछ सब्जियों का नहीं है। यह उन हजारों परिवारों की सेहत से जुड़ा सवाल है, जो हर दिन बाजार से सब्जियां खरीदकर अपने घर ले जाते हैं।