बेतिया नगर निगम की बैठक में हंगामा, पार्षदों का फूटा गुस्सा, आत्मदाह की कोशिश तक पहुंचा मामला
पार्षदों का आरोप है कि बैठक के दौरान कई विकास योजनाओं पर सभी की सहमति बनी थी। इन योजनाओं को लिखित रूप में महापौर को सौंपा गया, लेकिन महापौर ने कथित तौर पर उस कागज को फेंक दिया और बिना कोई बात कहे बैठक से उठकर चली गईं। इसके बाद बैठक का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया।
बैठक स्थल पर नारेबाजी, अधिकारी मौके से हटे
महापौर के जाने के बाद पार्षदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हंगामा बढ़ता देख मौके पर मौजूद अधिकारी भी बैठक स्थल छोड़कर चले गए। इसके बाद नाराज़ पार्षद नगर निगम के मुख्य गेट पर पहुंच गए और वहीं धरना-प्रदर्शन करने लगे।
आत्मदाह की कोशिश, पुलिस ने संभाला मोर्चा
स्थिति उस समय और गंभीर हो गई, जब कुछ पार्षदों ने अपने ऊपर तेल छिड़ककर आत्महत्या करने की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें रोक लिया और बड़ी घटना होने से बचा लिया। पुलिस ने हालात पर काबू पाने के लिए कुछ पार्षदों को हिरासत में भी लिया।
विधायक और एमएलसी ने लगाए आरोप
घटना के दौरान मौजूद विधान पार्षद वीरेंद्र प्रसाद यादव और पूर्व उपमुख्यमंत्री सह बेतिया विधायक रेणु देवी ने महापौर पर विकास कार्यों की अनदेखी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि नगर निगम में न तो नाला निर्माण हो रहा है, न ड्रेनेज की व्यवस्था सुधर रही है और न ही स्ट्रीट लाइट जैसे बुनियादी काम हो रहे हैं।
एमएलसी वीरेंद्र प्रसाद यादव ने नगर निगम में मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि यहां तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मामले को सदन में उठाया जाएगा और कार्रवाई की मांग की जाएगी।
महापौर का पक्ष नहीं आया सामने
इस पूरे मामले में महापौर गरिमा देवी सिकरिया से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका पक्ष सामने नहीं आ सका। नगर निगम की बैठक में हुए इस हंगामे ने शहर की राजनीति और विकास व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब देखना होगा कि यह विवाद सुलझता है या बेतिया की नगर राजनीति में तनाव और गहराता है।