पटना सिटी में डॉ. साथी की पुण्य स्मृति पर संगोष्ठी, शिक्षा और साहित्य में उनके योगदान को किया गया याद

 

पटना सिटी: शिक्षा और साहित्य को जीवन का उद्देश्य मानने वाले शिक्षाविद् एवं संत डॉ. सच्चिदानंद सिंह ‘साथी’ की पुण्य स्मृति पर गुरुवार को महेंद्रू स्थित व्योम सभागार में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ‘स्वरांजलि’ संस्था की ओर से आयोजित इस अवसर पर वक्ताओं ने डॉ. साथी के शैक्षणिक, साहित्यिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें एक युगपुरुष बताया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में मौजूद शिक्षाविद् डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि डॉ. साथी ने शिक्षा के क्षेत्र में कई ऐसे प्रतिमान स्थापित किए, जो आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने सरकार को शिक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए और छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए अनेक पुस्तकें लिखीं, जिन्हें विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में भी स्थान मिला। डॉ. ध्रुव कुमार ने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में भी डॉ. साथी का योगदान उल्लेखनीय रहा। लघुकथा विधा में उनकी पहचान ‘चरैवेति’ जैसे संग्रह के माध्यम से बनी, जिसने समाज को सकारात्मक दिशा देने का काम किया।

संस्था के संयोजक अनिल रश्मि ने कहा कि डॉ. साथी केवल एक शिक्षाविद् नहीं थे, बल्कि अपने आचरण और विचारों से संत समान व्यक्तित्व थे। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे डॉ. साथी के जीवन मूल्यों और आदर्शों को अपने जीवन में उतारें। कलाकार आलोक चोपड़ा ने कहा कि डॉ. साथी अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से हमेशा जीवित रहेंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. साथी के तैल चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर नेक आलम, डॉ. किरण सिन्हा, पारिजात सौरभ, डॉ. विजयेंद्र चंद्रवंशी, नितिन कुमार वर्मा, ओमप्रकाश चौबे, जितेंद्र कुमार पाल, राजा पुट्टू, मनोज कुमार, डॉ. शीला कुमारी और सुनीता रानी सहित कई साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने अपने विचार साझा किए।

पुण्य स्मृति पर्व के अवसर पर सामाजिक सरोकार को भी महत्व दिया गया। कार्यक्रम के अंत में जरूरतमंदों के बीच भोजन और कंबल का वितरण किया गया, जिससे डॉ. साथी की सेवा और समर्पण की भावना को आगे बढ़ाया जा सके।