प्रीपेड मीटर स्विच पर 3% छूट का विकल्प: बिजली महंगी होने से घरों पर पड़ेगा असर, 1 अप्रैल से महंगे बिलों का असर...
Jharkhand: झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने प्रदेश की नई बिजली दरों की घोषणा कर दी है, जिसके तहत बिजली की कीमतों में कुल 6.12 फीसदी की वृद्धि की गई है. हालांकि, झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम ने अपनी वित्तीय जरूरतों का हवाला देते हुए दरों में 59 फीसदी बढ़ोतरी का भारी-भरकम प्रस्ताव दिया था, लेकिन आयोग ने उपभोक्ताओं के हितों का ध्यान रखते हुए इसे काफी कम रखा.
नई दरों की घोषणा करते समय आयोग ने किसानों का विशेष ध्यान रखा है. जस्टिस नवनीत कुमार ने स्पष्ट किया कि कृषि क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए टैरिफ में कोई बदलाव नहीं किया गया है. सिंचाई और खेती से जुड़ी अन्य गतिविधियों के लिए बिजली पहले की तरह पुरानी दरों पर ही मिलती रहेगी, जिससे अन्नदाताओं पर कोई अतिरिक्त भार नहीं पड़ेगा.
मुख्य बिंदु
- झारखंड राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिजली की दरों में औसतन 6.12% की बढ़ोतरी को मनज़ूरी दे दी है.
- यह बढ़ोतरी 1 अप्रैल 2026 से लागू होगी और उपभोक्ताओं के बिजली बिलों पर असर करेगी.
- शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को अब लगभग ₹7.40 प्रति यूनिट देना होगा, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह ₹7.20 प्रति यूनिट के आसपास होगी.
- घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में हर यूनिट पर ₹0.50–₹0.60 तक की बढ़ोतरी आएगी.
- कृषि उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दरों से राहत दी गई है — उनकी बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी लागू नहीं होगी.
- प्रीपेड मीटर स्विच करने पर 3% छूट जैसे प्रोत्साहन भी दिए गए हैं.
क्यों बढ़ी दरें?
आयोग ने जेबीवीएनएल के प्रस्ताव पर कुछ कटौती करते हुए भी बिजली टैरिफ में वृद्धि को मंजूरी दी है ताकि निगम के खर्च संतुलित रहें और वितरक की वित्तीय स्थिति बिगड़े न.
डिस्ट्रीब्यूशन लॉस पर लगाम
आयोग ने वितरण निगम की कार्यप्रणाली पर भी कड़ा रुख अपनाया है. प्रस्तावित उच्च वितरण घाटे के दावों को नकारते हुए आयोग ने डिस्ट्रीब्यूशन लॉस की सीमा को मात्र 13 फीसदी पर ही सीमित कर दिया है. इसका मतलब यह है कि निगम की अपनी अक्षमता या बिजली चोरी के कारण होने वाले घाटे की पूरी वसूली अब उपभोक्ताओं के बिल से नहीं की जा सकेगी.