झारखंड के सारठ में SIR के दौरान 34 संदिग्ध प्रमाण पत्र मिले, प्रज्ञा केंद्र संचालक समेत लोगों पर FIR
Jharkhand News: झारखंड के देवघर जिले के सारठ प्रखंड में SIR प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। जांच के दौरान 34 लोगों के जातीय और आवासीय प्रमाण पत्र संदिग्ध पाए गए हैं। मामले में अंचल कार्यालय की ओर से जांच के बाद प्रज्ञा केंद्र संचालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है, जबकि 34 लोगों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
जानकारी के मुताबिक, प्रखंड विकास पदाधिकारी के स्तर से कुल 191 लोगों के जातीय और आवासीय प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराया जा रहा था। इसी दौरान 34 प्रमाण पत्रों पर संदेह हुआ। इसके बाद अंचल कार्यालय ने संबंधित दस्तावेजों की दोबारा जांच कराई और प्रमाण पत्र धारकों का भी सत्यापन किया।
एक से ज्यादा गांवों में नाम दर्ज होने की जानकारी
सारठ के अंचलाधिकारी के. चंद्र सिंह मुंडा के मुताबिक, जांच में सामने आया कि संदिग्ध पाए गए सभी 34 लोग नवादा गांव के निवासी हैं। जांच के दौरान इनके नाम दूसरे गांवों में भी दर्ज होने की जानकारी मिली।
आरोप है कि SIR प्रक्रिया में नवादा गांव से नाम शामिल कराने के उद्देश्य से दूसरे गांव से संबंधित रिकॉर्ड हटाने के बाद जातीय और आवासीय प्रमाण पत्र तैयार कराए गए। हालांकि, इस संबंध में अंतिम स्थिति पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
मामला सामने आने के बाद अंचलाधिकारी ने नवादा स्थित प्रज्ञा केंद्र के संचालक से प्रमाण पत्रों के निर्माण से जुड़ी जानकारी मांगी। दस्तावेजों की जांच में अनियमितता पाए जाने के बाद उनके खिलाफ पत्थरअड्डा ओपी में शिकायत दर्ज कराई गई।
पुलिस जांच में सामने आएगी पूरी तस्वीर
अंचल कार्यालय की शिकायत के आधार पर 34 संदिग्ध मामलों में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि संबंधित लोगों के नाम किन-किन गांवों में दर्ज हैं और उनके जातीय एवं आवासीय प्रमाण पत्र किस प्रक्रिया के तहत तैयार किए गए।
जांच के बाद यह भी स्पष्ट होगा कि प्रमाण पत्रों में कथित गड़बड़ी किस स्तर पर हुई और SIR प्रक्रिया में नाम शामिल कराने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया या नहीं।
पूर्व विधायक ने लगाए बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप
इधर, सारठ के पूर्व विधायक रणधीर सिंह ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। 34 संदिग्ध प्रमाण पत्रों का मामला सामने आने के बाद उन्होंने दावा किया कि गड़बड़ी सिर्फ इन मामलों तक सीमित नहीं हो सकती।
रणधीर सिंह ने आरोप लगाया कि झारखंड में सरकार के दबाव में SIR प्रक्रिया सही तरीके से नहीं हो रही है। उन्होंने दावा किया कि पूरे सारठ क्षेत्र में 10 हजार से अधिक लोग ऐसे हो सकते हैं, जो गलत तरीके से SIR में अपना नाम शामिल कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, इस बड़े दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस मामले में सामने नहीं आई है।
फिलहाल प्रशासन के स्तर पर 34 संदिग्ध प्रमाण पत्रों से जुड़े मामले की जांच पुलिस को सौंप दी गई है। पुलिस की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दस्तावेजों में वास्तविक गड़बड़ी क्या थी और इस मामले में कितने लोग या अन्य पक्ष जिम्मेदार पाए जाते हैं।