11 वर्षों की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कामेश्वर पांडेय हत्याकांड का फैसला, अदालत ने दो दोषियों को सुनाई उम्रकैद की सजा

Ramgarh: रामगढ़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विशाल श्रीवास्तव की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा दी. इसके अलावा धारा 120(बी) में भी आजीवन कारावास और जुर्माना लगाया गया. आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई. 
 

Ramgarh: रामगढ़ जिले में वर्ष 2015 में हुए कामेश्वर पांडेय हत्याकांड में अदालत ने 11 साल बाद बड़ा फैसला सुनाया है. न्यायालय ने इस मामले में दो दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है.

अदालत का फैसला: 

अदालत ने सुनवाई पूरी होने के बाद दोनों आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दिया. दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत उम्रकैद की सजा दी गई है. इसके साथ ही आर्म्स एक्ट की धाराओं में भी सजा सुनाई गई है. अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है, जुर्माना नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा का प्रावधान रहेगा.

मामले की पृष्ठभूमि:
26 अक्टूबर 2015 को पतरातू क्षेत्र में सब्जी बाजार के पास कामेश्वर पांडेय की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना के बाद इलाके में सनसनी फैल गई थी. पुलिस ने मामले की जांच कर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, जिसके बाद लंबी कानूनी प्रक्रिया चली.

परिजनों को मिला न्याय:
करीब 11 साल बाद आए इस फैसले से मृतक के परिजनों ने संतोष जताया है. उनका कहना है कि न्याय मिलने में भले ही समय लगा, लेकिन अदालत के फैसले से कानून पर भरोसा मजबूत हुआ है.

क्या था पूरा मामला

26 अक्टूबर 2015 को पतरातू बस्ती निवासी कामेश्वर पांडे की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. घटना राम जानकी मंदिर के पास साप्ताहिक बाजार में हुई थी, जहां बाइक सवार अपराधियों ने नजदीक से सिर में गोली मारी थी.

घटना के बाद मची थी अफरा-तफरी

हत्याकांड के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई थी. स्थानीय लोगों ने हमलावरों का पीछा किया, जिसमें एक आरोपी भीड़ के हत्थे चढ़ गया और पिटाई में उसकी मौत हो गई. दूसरा आरोपी पुलिस के कब्जे में आ गया था, जबकि एक आरोपी फरार हो गया था.

लंबी जांच के बाद आया फैसला

मामले में पवन किशोर पांडे के आवेदन पर पतरातू थाना कांड संख्या 250/2015 दर्ज किया गया था. पुलिस जांच, गवाहों के बयान और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत ने अमन श्रीवास्तव और लखन साव को दोषी मानते हुए सजा सुनाई. वहीं अजय प्रकाश सिंह उर्फ गणेश सिंह को साक्ष्य के अभाव में पहले ही बरी किया जा चुका है. यह फैसला पतरातू क्षेत्र के सबसे चर्चित आपराधिक मामलों में से एक का निर्णायक अंत माना जा रहा है.