हाथी के कहर से उजड़ा घर- मां-बेटी की मौत के बाद गांव में मातम, वन विभाग पर फूटा गुस्सा
घटना के बाद जब दोनों के शव गांव पहुंचे, तो चीख-पुकार से माहौल गूंज उठा। देर शाम मां का अंतिम संस्कार किया गया, जबकि बेटी को दफनाया गया। इस दौरान पूरे गांव की आंखें नम थीं कई घरों में चूल्हा तक नहीं जला।
लगातार बढ़ रहा हाथियों का आतंक
चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। बीते चार महीनों में ही हाथियों के हमले से तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं। हाल ही में कुकड़ू प्रखंड में भी एक बुजुर्ग को हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला था।
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा
घटना के बाद ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की। लोगों का कहना है कि बार-बार ऐसी घटनाएं हो रही हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पा रहा है।
वन विभाग का आश्वासन
वन विभाग के अधिकारियों ने घायलों से मुलाकात कर इलाज के लिए तत्काल 10-10 हजार रुपये की सहायता दी है और जरूरत पड़ने पर और मदद का भरोसा दिया है। साथ ही हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने के लिए ड्राइव टीम को तैनात किया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में स्थायी रेंजर की कमी और एक ही अधिकारी पर कई इलाकों का प्रभार होने के कारण स्थिति पर सही तरीके से नियंत्रण नहीं हो पा रहा है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक ग्रामीणों को जंगली हाथियों के खौफ में जीना पड़ेगा।