झारखंड में नगर निकाय चुनावों में हार के बाद कांग्रेस के अंदर समीक्षा बैठक की उठ रही मांग...
Ranchi: झारखंड में नगर निकाय का चुनाव संपन्न हो गया है. चुनाव परिणामों के बाद अब सभी दल इसकी समीक्षा में जुट गए हैं. कांग्रेस में भी समीक्षा बैठक की मांग उठने लगी है. कांग्रेस को भी इस बात का मलाल है कि रांची और मेदिनीनगर में पूरी संभावना के बावजूद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार मेयर चुनाव नहीं जीत पाए.
लोहरदगा नगर परिषद में भी पार्टी का हाल कुछ ऐसा ही रहा. यहां से सांसद और विधायक दोनों कांग्रेस पार्टी के ही हैं, बावजूद कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार अध्यक्ष नहीं बन सका. गुमला की भी कहानी कुछ ऐसी ही रही. इन तमाम नाकामियों को लेकर अब कांग्रेस के अंदर से चुनाव परिणामों की जल्द विस्तृत समीक्षा बैठक बुलाने की मांग उठने लगी है.
कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता जगदीश साहू ने समीक्षा बैठक बुलाने की मांग करते हुए वर्ष 2025 में चले संगठन सृजन वर्ष की उपलब्धियों पर ही सवाल उठा दिया. जगदीश साहू ने कहा कि बहुत सारे जिलों और नगर निकाय क्षेत्रों में क्या स्थिति-परिस्थिति थी कि मतदान के दिन बूथ लेवल पर एजेंट ही नहीं थे या मतगणना के दौरान हर टेबल पर हमारा आदमी था या नहीं, इसकी समीक्षा जरूरी है.
जगदीश साहू ने कहा कि संगठन सृजन वर्ष का फायदा निसंदेह मिला है, लेकिन उसे और मजबूत करने की जरूरत है. चतरा से कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार ने ढंग से चुनाव क्यों नहीं लड़ा, लोहरदगा जैसे क्षेत्र में हमारा अध्यक्ष क्यों नहीं बना, इसके लिए बहुत जरूरी है कि समीक्षा हो.
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति उर्फ रिंकू तिवारी ने माना कि महागठबंधन के दलों के अलग-अलग लड़ने का फल हमें मिला कि हम कई निकाय क्षेत्रों खासकर नगर निगम में अपना मेयर नहीं बनवा सके.
रिंकू तिवारी ने कहा कि रांची नगर निगम में मेयर सीट पर हमारी हार, झामुमो के बदले की राजनीति की वजह से नहीं हुई. हमारा मानना था कि दलीय चुनाव नहीं हो रहा है. ऐसे में अपनी-अपनी क्षमताओं का आकलन करें. आपसी समन्वय की कोशिश सफल नहीं हुई. ऐसे में सभी कार्यकर्ताओं-नेताओं को मौका तो मिला लेकिन नतीजों में हम पिछड़ गए.
समीक्षा की उठ रही मांग को लेकर प्रदेश महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि हमनें बखूबी मजबूती से चुनाव लड़ा. रांची नगर निकाय चुनाव में 04 लाख से अधिक मत पड़े, जिसमें 1.40 लाख वोट कांग्रेस समर्थित मेयर प्रत्याशी रमा खलखो को मिले. यह साबित करता है कि शहर में हमारा जनादेश कायम है. राकेश सिन्हा ने कहा कि हमारे कार्यकर्ताओं ने तन मन से चुनाव लड़ा. इसलिए अफसोस की कोई बात नहीं है.
उन्होंने माना कि महागठबंधन के दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने का लाभ भाजपा को मिला है. उन्होंने कहा कि हमारे वोटों के बिखराव का लाभ भाजपा को मिला. अगर हम मिलकर लड़ते तो नतीजा भाजपा के खिलाफ जाता. बावजूद इसके इस चुनाव से यह बात स्पष्ट हो गया कि शहर में हमारा जनाधार था, जनाधार है और आगे भी रहेगा.