झारखंड में कृषि क्रांति! अब ड्रोन से खेती करेंगे किसान, जानिए क्या बदलेगा?

झारखंड में खेती को आधुनिक और हाईटेक बनाने की तैयारी तेज हो गई है.अब राज्य के किसानों को पारंपरिक खेती के साथ ड्रोन और डिजिटल तकनीक से जोड़ने की दिशा में पहल की जा रही है. इसके तहत कृषि कार्यों में आधुनिक मशीनों और तकनीकी संसाधनों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा. ड्रोन की मदद से खेतों में निगरानी, फसलों पर छिड़काव और अन्य कृषि कार्यों को आसान बनाया जा सकेगा.
 

Ranchi: झारखंड में खेती को आधुनिक स्वरूप देने और किसानों को बदलते मौसम की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। अब राज्य के किसान पारंपरिक तरीकों के साथ ड्रोन, डिजिटल तकनीक और स्मार्ट सिंचाई प्रणाली की मदद से खेती कर सकेंगे। इस पहल की शुरुआत रामगढ़ जिले के चार गांवों से होगी, जहां किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने की योजना तैयार की गई है।

इस दिशा में सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट लिमिटेड (सीएमपीडीआइ) और निधि समृद्धि फाउंडेशन ने हाथ मिलाया है। दोनों संस्थाओं के बीच 29 अक्टूबर को रांची स्थित सीएमपीडीआइ मुख्यालय में समझौता हुआ। इसके तहत कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के माध्यम से 'उन्नत कृषि परियोजना' संचालित की जायेगी।

100 किसानों को मिलेगा आधुनिक खेती का लाभ

इस परियोजना के लिए रामगढ़ जिले के पतरातू प्रखंड की बिचा पंचायत को चुना गया है। इसके अंतर्गत बिचा, लेम, सुथारपुर और सालगो गांवों में कृषि गतिविधियों को तकनीक आधारित बनाया जायेगा। परियोजना से करीब 100 किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह पहल दो वित्तीय वर्षों यानी 2026-27 और 2027-28 तक चलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना, कृषि संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल सुनिश्चित करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने की क्षमता विकसित करना है।

खेतों में ड्रोन से लेकर स्मार्ट सिंचाई तक की सुविधा

परियोजना के तहत खेती में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी) और सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आइसीटी) का इस्तेमाल किया जायेगा। किसानों को मिट्टी की उन्नत जांच, मौसम की निगरानी और डिजिटल माध्यम से कृषि संबंधी सलाह उपलब्ध कराने की योजना है।

इसके अलावा खेतों में स्मार्ट सिंचाई प्रणाली लागू की जायेगी। ड्रोन आधारित कृषि सेवाओं के जरिये खेती के विभिन्न कार्यों को अधिक आसान और प्रभावी बनाने पर जोर रहेगा। खास बात यह होगी कि किसान वास्तविक समय में मिलने वाले आंकड़ों के आधार पर फसल और खेती से जुड़े फैसले ले सकेंगे।

प्रशिक्षण और शैक्षणिक भ्रमण से सीखेंगे खेती के नए तरीके

परियोजना का उद्देश्य केवल किसानों तक तकनीक पहुंचाना नहीं, बल्कि उन्हें इसका सही इस्तेमाल करना भी सिखाना है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे। साथ ही किसानों को शैक्षणिक भ्रमण पर भी ले जाया जायेगा, ताकि वे आधुनिक कृषि पद्धतियों को करीब से समझ सकें।

किसानों को बदलते मौसम के अनुसार फसल प्रबंधन, पानी और अन्य संसाधनों के बेहतर उपयोग तथा वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की जानकारी दी जायेगी। माना जा रहा है कि इस पहल से रामगढ़ के चयनित गांवों में खेती को अधिक तकनीक आधारित और जलवायु अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी।