जेल में महिला कैदी से कथित यौन शोषण, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर मांगी रिपोर्ट
Ranchi: रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा होटवार में महिला कैदी के साथ कथित यौन शोषण के मामले पर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार और झारखंड पुलिस के डीजीपी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. हाईकोर्ट ने पूछा है कि जेल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद ऐसी घटना कैसे हुई और अब तक दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है. अदालत ने राज्य सरकार से महिला कैदियों की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी है.
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ कैदियों को हिरासत में रखना नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना भी है. मामले में अगली सुनवाई के दौरान सरकार और डीजीपी को जवाब दाखिल करना होगा.
गृह विभाग ने बनाई है जांच टीम
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय और न्यायमूर्ति पीके श्रीवास्तव की वेकेशन बेंच में मामले की सुनवाई हुई. कोर्ट को जानकारी दी गई कि राज्य सरकार के गृह विभाग ने जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी गठित की है. इस समिति में निदेशक प्रशासन मनोज कुमार, सहायक कारा निरीक्षक तुषार रंजन गुप्ता और कारा एवं सुधारात्मक सेवाएं निरीक्षणालय के प्रोबेशन पदाधिकारी चंद्रमोली सिंह को शामिल किया गया है.
इसके अलावा, झालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति एसएन प्रसाद के निर्देश पर रांची जिला विधिक सेवा प्राधिकरण यानी डालसा की टीम ने मामले में पूछताछ की है. जांच रिपोर्ट के आधार पर न्यायिक जांच की जा रही है. वहीं रांची जिला प्रशासन और जेल आईजी के स्तर पर अलग-अलग जांच शुरू कर दी गई है. उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक टीम भी पूरे मामले की पड़ताल में जुटी है.
कैसे सामने आया मामला
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेल के भीतर महिला कैदी के कथित यौन शोषण का मुद्दा सार्वजनिक रूप से उठाया. इसके बाद मीडिया में खबरें सामने आई, जिससे राज्यभर में हड़कंप मच गया. इस मसले पर भाजपा लगातार चौतरफा हमला बोल रही है. 21 मई को नेता प्रतिपक्ष ने सीएम के नाम पत्र जारी कर निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच के साथ दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की थी.
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया है कि जेलर लवकुश कुमार ने चतरा में पदस्थापन के दौरान एक महिला होमगार्ड का शारीरिक शोषण किया. विरोध करने पर पीड़िता के परिवार को धमकाया गया. वहीं भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने जेल अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर पर देवघर और हजारीबाग में पदस्थापन के दौरान लगे गंभीर आरोपों का जिक्र कर कार्रवाई की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि महिला कैदी के साथ यौन शोषण नहीं हुआ तो 17 मई को गर्भावस्था जांच की जरूरत क्यों पड़ी.