कई आरोपी के साथ बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर CM सोरेन पर साधा निशाना, कहा- सौतेला व्यवहार किसी से छुपा नहीं...
Ranchi: उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं. लिहाजा, असम के आदिवासियों की लड़ाई के साथ हम लोग हैं और जरूरत पड़ेगी तो पूरे झारखंड के आदिवासी को असम लेकर जाएंगे.
Feb 3, 2026, 15:24 IST
Ranchi: झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर झामुमो अध्यक्ष सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आड़े हाथों लिया है. 2 फरवरी को दुमका में झामुमो के स्थापना दिवस के मौके पर सीएम द्वारा दिए गए भाषण के एक क्लिप को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर बाबूलाल मरांडी ने आरोपों की झड़ी लगा दी है.
अब सवाल है कि सीएम ने अपने भाषण में ऐसा क्या कहा कि बाबूलाल मरांडी इस कदर बिफर पड़े.
दरअसल, दुमका में झामुमो के 47 वें स्थापना दिवस के दिन भाषण में सीएम ने अपने असम दौरे का हवाला देते हुए कहा था कि वहां के चाय बागानों में ले जाए गये झारखंड के आदिवासी आज तक पहचान की लड़ाई लड़ रहे हैं.
उन्हें आदिवासी का अधिकार और दर्जा नहीं दिया गया है. उन्हें यातनाएं दी जा रही हैं. लिहाजा, असम के आदिवासियों की लड़ाई के साथ हम लोग हैं और जरूरत पड़ेगी तो पूरे झारखंड के आदिवासी को असम लेकर जाएंगे.
सीएम के इस बयान की एक क्लिप को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि झारखंड के आदिवासी आपकी जागीर नहीं हैं कि उन्हें जब चाहें, जहां चाहें ले जाकर राजनीतिक भीड़ का हिस्सा बना दें.
उन्होंने कहा कि झारखंड के आदिवासी उन बेबस विधायकों की तरह नहीं हैं जिन्हें बसों में भरकर रायपुर भेज दिया जाए.
बाबूलाल मरांडी ने दिवंगत शिबू सोरेन पर भी निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि चंद करोड़ रुपये में आदिवासी समाज की भावनाओं और झारखंड आंदोलन को बेचने वाले अपने पिता की दकियानूसी सोच से बाहर निकलिए. आदिवासी समाज अपने स्वाभिमान, पहचान और अधिकारों को लेकर सजग हो रहा है.
बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाते हुए कहा है कि झारखंड में आदिवासियों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है. कहा आदिवासी समाज के युवा सूर्या हांसदा की हत्या कर दी गई.
रांची में आदिवासी नेता सुभाष मुंडा और खूंटी में सोमा मुंडा की भी हत्या कर दी गई. रिम्स-2 के नाम पर आदिवासियों की जमीन हड़पने की साजिश की गई. सिरमटोली में सरना स्थल की पवित्रता भंग करने का प्रयास हुआ.
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि संथाल परगना से लेकर कोल्हान तक बांग्लादेशी घुसपैठियों को बसाने का खेल चल रहा है.
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि पेसा एक्ट के नाम पर आदिवासियों के साथ विश्वासघात किया गया है.
कन्वर्जन माफियाओं को खुश करने के लिए स्वशासन और रूढ़िवादी परंपरा की परिभाषा बदल दी गई है, आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन खनन माफियाओं के हाथों सौंप दिए गए हैं.