हादसे को दिया जा रहा निमंत्रण, रांची में एक ऐसा इलाका, जहां जर्जर बिजली के तारों को बांस के खंभे से जोड़ा गया है..कभी भी घट सकता है बड़ा हादसा...
Ranchi: राजधानी रांची के अरगोड़ा स्थित रुकमनी नगर में विकास के दावे और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है. एक ओर इलाके में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, वहीं दूसरी ओर बिजली आपूर्ति आज भी बांस के सहारे चल रही है...
Jan 19, 2026, 16:24 IST
Ranchi: एक छोटी सी चिंगारी भारी तबाही ला सकती है, वो चिंगारी आग की हो या बिजली के करंट की. जो कभी भी हादसे का बड़ा रूप लेकर बड़ी तबाही मचा सकती है.
ऐसे में हमेशा इसमें सावधानी बरतने की जरूरत है. लेकिन झारखंड की राजधानी रांची के इस इलाके में शायद ऐसा कुछ नजर नहीं आता है. यहां न तो विभाग की मुस्तैदी नजर आती है और न ही सुरक्षा मानकों को लेकर किए काम दिखाई देते हैं. ईटीवी भारत की ग्राउंड रिपोर्ट से जानें, रांची के इस इलाके का पूरा हाल.
राजधानी रांची के अरगोड़ा स्थित रुकमनी नगर में विकास के दावे और जमीनी हकीकत के बीच गहरी खाई साफ नजर आ रही है. एक ओर इलाके में स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं.
वहीं दूसरी ओर बिजली आपूर्ति आज भी बांस के सहारे चल रही है. जर्जर बिजली तार और अस्थायी बांस के खंभे किसी भी वक्त बड़े हादसे को न्योता दे रहे हैं. बरसात के मौसम में हालात और भी भयावह हो जाते हैं. जब जलजमाव के बीच लटकती बिजली की तारें लोगों की जान पर भारी पड़ सकती हैं.
स्थानीय लोगों के अनुसार रुकमनी नगर में लंबे समय से बिजली की तारें बांस पर दौड़ रही हैं. यह व्यवस्था अस्थायी बताई गई थी, लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी इसे स्थायी समाधान में नहीं बदला गया. तेज हवा चलने पर बांस हिलने लगते हैं और कई बार गिर भी जाते हैं. ऐसे में बिजली की तारें जमीन पर आ जाती हैं या बेहद नीचे लटकने लगती हैं, जिससे करंट लगने की आशंका बनी रहती है. लोगों का कहना है कि रात के अंधेरे में यह खतरा और बढ़ जाता है.
बरसात के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है. इलाके की सड़कों की हालत पहले से ही जर्जर है. जगह-जगह गड्ढे हैं और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में गलियां पानी से भर जाती हैं. कई स्थानों पर घुटनों तक पानी जमा हो जाता है. इसी पानी के बीच यदि बिजली की तार गिर जाए तो यह स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि बरसात में पैदल चलना भी किसी चुनौती से कम नहीं होता.
रुकमनी नगर के निवासियों का कहना है कि स्मार्ट मीटर लगाने के दौरान उम्मीद जगी थी कि बिजली व्यवस्था भी मजबूत और सुरक्षित होगी. अधिकारियों द्वारा यह भरोसा दिलाया गया था कि जल्द ही पक्के खंभे लगाए जाएंगे और तारों को व्यवस्थित किया जाएगा. लेकिन मीटर तो लग गए, जबकि बिजली के खंभे आज भी बांस के ही हैं.
लोगों का सवाल है कि जब सरकार डिजिटल और स्मार्ट सुविधाओं की बात कर रही है, तो बुनियादी ढांचा इतना कमजोर क्यों है.
इलाके में सड़क और नाली की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है. टूटी सड़कों और गंदे पानी के कारण लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है. बारिश के दौरान गंदा पानी घरों में घुस जाता है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. मच्छरों का प्रकोप भी आम बात हो गई है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार बिजली विभाग और नगर निगम से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. कभी निरीक्षण के नाम पर अधिकारी आते हैं लेकिन समस्या जस की तस बनी रहती है. लोगों की मांग है कि इलाके में जल्द से जल्द पक्के बिजली के खंभे लगाए जाएं, जर्जर तारों को बदला जाए और सड़कों के साथ जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए.
रुकमनी नगर के निवासियों का कहना है कि किसी बड़े हादसे का इंतजार किए बिना प्रशासन को तत्काल कदम उठाने चाहिए. स्मार्ट मीटर तभी सार्थक होंगे, जब बिजली व्यवस्था सुरक्षित होगी. फिलहाल बांस पर टिकी बिजली और बरसात में बदहाल सड़कें इलाके के लोगों के लिए रोजमर्रा की चिंता बनी हुई है.