भारतीय एथलेटिक्स को बड़ा झटका, अर्जुन अवार्डी बलविंदर सिंह ने दुनिया को कहा अलविदा
Jamshedpur: खेल जगत के लिए एक दुखद खबर सामने आई है. टाटा स्टील के पूर्व स्पोर्ट्स ऑफिसर और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ खिलाड़ी बलविंदर सिंह ढालीवाल का निधन हो गया. उनके निधन की खबर से खेल प्रेमियों और खिलाड़ियों में शोक की लहर दौड़ गई है.
बलविंदर सिंह भारतीय एथलेटिक्स के जाने-माने नामों में शामिल थे. उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर शॉटपुट (गोला फेंक) प्रतियोगिताओं में कई उपलब्धियां हासिल की थीं और खेलों में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. खेल प्रशासन और खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.
युवा खिलाड़ियों को तराशने में निभाई अहम भूमिका
मूल रूप से पंजाब के गुरदासपुर के रहने वाले बलविंदर सिंह का शॉट पुट में ऐसा दबदबा था कि उनकी उपलब्धियों को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया गया था. टाटा स्टील से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वह खेल से लगातार जुड़े रहे. वह स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI), एथलीट फेडरेशन ऑफ इंडिया और पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़कर युवा खिलाड़ियों को तराशने का काम कर रहे थे. वर्तमान में वह चंडीगढ़ में एक स्पोर्ट्स एकेडमी चला रहे थे, जहां से प्रशिक्षण पाकर करीब 20 से 25 खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का मान बढ़ाया. इसके अलावा वह दिल्ली के गुरुद्वारा बाबा विरसा सिंह गोविंद सदन के प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे.
3 जून को चंडीगढ़ में होगा अंतिम संस्कार
पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, बलविंदर सिंह का अंतिम संस्कार 3 जून को चंडीगढ़ के सेक्टर 25 स्थित बर्निंग घाट पर किया जाएगा. उनकी बेटी हरमन कौर के इंग्लैंड से लौटने के बाद अंतिम विदाई दी जाएगी.
उनके निधन पर टाटा स्टील खेल विभाग के पदाधिकारियों, सेंट्रल गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान भगवान सिंह, इंटरनेशनल साइकिलिस्ट सरदार इंद्रजीत सिंह सहित, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी रणजीत सिंह, शैलेंद्र सिंह, प्रधान सरदार निशान सिंह, कौमी सिख मोर्चा के अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह, सतबीर सिंह सोमू देश के कई नामचीन खिलाड़ियों और खेल संघों ने गहरा दुख व्यक्त किया है. खेल प्रेमियों ने इसे राष्ट्र और खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है.
टाटा स्टील के खेल विभाग से जुड़े रहने के दौरान उन्होंने अनेक युवा खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने में योगदान दिया. उनके नेतृत्व और अनुभव का लाभ कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को मिला. खेल जगत में उन्हें एक अनुशासित अधिकारी, प्रेरक मार्गदर्शक और समर्पित खेल प्रशासक के रूप में याद किया जाता है.