पलामू-गढ़वा समेत 5 जिलों में शस्त्र लाइसेंस की जांच! PТР ने मांगी जानकारी
Palamu: पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) ने वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर अपने आसपास के इलाकों में मौजूद लाइसेंसी हथियारों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में PTR ने पलामू, गढ़वा, लातेहार, गुमला और लोहरदगा जिला प्रशासन से शस्त्र लाइसेंस से संबंधित जानकारी मांगी है। PTR यह जानकारी जुटाना चाहता है कि रिजर्व से जुड़े इलाकों में कितने लाइसेंसी हथियार हैं और उन्हें किन लोगों को जारी किया गया है।
अब तक लातेहार जिला प्रशासन की ओर से जानकारी उपलब्ध कराई गई है, जिसके अनुसार PTR क्षेत्र से संबंधित इलाके में 10 लाइसेंसी हथियार हैं। वहीं, खबर लिखे जाने तक अन्य जिलों की ओर से जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जुटाई जा रही जानकारी
पलामू टाइगर रिजर्व वन्यजीवों के संरक्षण और अवैध शिकार पर रोक लगाने के लिए लगातार निगरानी रखता है। इसी उद्देश्य से रिजर्व से सटे क्षेत्रों में मौजूद लाइसेंसी हथियारों की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
PTR के अधिकारियों का कहना है कि इस जानकारी से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रिजर्व से जुड़े क्षेत्रों में कितने लाइसेंसी हथियार मौजूद हैं और उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा है। साथ ही, वन्यजीवों के शिकार में हथियारों के संभावित दुरुपयोग पर भी नजर रखी जा सकेगी।
10 किलोमीटर के दायरे में विशेष नियम
पलामू टाइगर रिजर्व से सटे 10 किलोमीटर के दायरे में शस्त्र लाइसेंस से संबंधित मामलों को लेकर विशेष प्रावधान लागू हैं। PTR के अनुसार, इस क्षेत्र में शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामलों में रिजर्व के उपनिदेशक या निदेशक स्तर के अधिकारियों की सहमति जरूरी होती है।
इसी को लेकर PTR की ओर से संबंधित जिलों के उपायुक्तों (DC) को पत्र भेजा गया है। पत्र के माध्यम से शस्त्र लाइसेंस से संबंधित जानकारी PTR के साथ साझा करने और नियमों के तहत आवश्यक मामलों में सहमति लेने का आग्रह किया गया है।
पांच जिलों से मांगी गई जानकारी
PTR के उपनिदेशक प्रजेशकांत जेना ने बताया कि पलामू, गढ़वा, लातेहार, गुमला और लोहरदगा जिलों से शस्त्र लाइसेंस के संबंध में जानकारी मांगी गई है। उनका कहना है कि PTR के आसपास के इलाकों में मौजूद हथियारों की जानकारी रिजर्व के पास रहना जरूरी है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रभावी निगरानी की जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यह देखा जाना जरूरी है कि रिजर्व से जुड़े क्षेत्रों में मौजूद हथियारों का इस्तेमाल कहीं वन्यजीवों के शिकार के लिए तो नहीं किया जा रहा है।
इको-सेंसिटिव जोन पर भी निगरानी
पलामू टाइगर रिजर्व इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) को लेकर भी सतर्क है। रिजर्व से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, इको-सेंसिटिव जोन और रिजर्व के निर्धारित दायरे में लाइसेंसी हथियारों को लेकर भी कई नियम और दिशा-निर्देश हैं, जिनका पालन किया जाना आवश्यक है।
शस्त्र लाइसेंस का ब्योरा जुटाने की यह प्रक्रिया वन्यजीव संरक्षण और रिजर्व से जुड़े संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।