बाबूलाल का CM को पत्र, स्वास्थ्य विभाग के टेंडर में हुई अनियमितता की कराएं उच्चस्तरीय जांच

Jharkhand Desk: नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में टेंडर घोटाला का आरोप लगाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है. इस बाबत बाबूलाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है. पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता के साक्ष्य मिले हैं.
 
नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में टेंडर घोटाला का आरोप लगाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है. इस बाबत बाबूलाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है. पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता के साक्ष्य मिले हैं.

Jharkhand Desk: नेता प्रतिपक्ष और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्वास्थ्य विभाग में टेंडर घोटाला का आरोप लगाते हुए इसकी उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से की है. इस बाबत बाबूलाल ने मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा है. पत्र में बाबूलाल मरांडी ने कहा है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितता के साक्ष्य मिले हैं. उन्होंने कहा है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और सार्वजनिक दस्तावेजों से यह स्पष्ट होता है कि सुनियोजित ढंग से प्रतिस्पर्धा को सीमित कर कुछ खास चुनिंदा लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया है.

बाबूलाल ने पत्र के माध्यम से कहा है कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि शासन की पारदर्शिता और संवैधानिक सिद्धांतों पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है. इसलिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है.

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि एक ही परिवार ने तीन कंपनियां बनाकर पूरे घोटाले को अंजाम दिया। इन कंपनियों के नाम हैं – हैंड इंफा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड, एमएस भारत आर्ट एंड सप्लायर और एमएस ग्लोबल आर्ट एंड सप्लायर. सभी कंपनियों का पता रांची के इरगु रोड पहाड़ी टोला में है और इनके निदेशक/प्रोप्राइटर ख्वाजा अब्दुल गुदिर अहमद बट, ख्वाजा मोहसिन अहमद और फरहान अहमद बट हैं. मरांडी ने कहा कि ख्वाजा मोहसिन अहमद एक ही समय में दो कंपनियों का निदेशक हैं, जिसके कारण सभी टेंडर रद्द किए जाने चाहिए थे. लेकिन स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के संरक्षण में इन्हें बार-बार ‘टेक्निकली क्वालीफाई’ घोषित किया गया.

बाबूलाल ने कहा कि झारखंड के 11 जिलों में 11 टेंडरों का हवाला देते हुए बताया कि सभी टेंडर केवल इन तीन कंपनियों को दिए गए. टेंडरों की बोलियों में केवल कुछ हजार रुपये का अंतर पाया गया, जिससे यह स्पष्ट है कि दरें एक ही स्रोत से तय की गई थीं. जब किसी अन्य कंपनी ने टेंडर में भाग लेने की कोशिश की, तो उसे तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर बाहर कर दिया गया. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कंपनियों को भुगतान वास्तविक बाजार मूल्य से कहीं अधिक किया गया.

मरांडी ने मुख्यमंत्री से कहा कि प्राथमिक सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज कराकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. उन्होंने जेम पोर्टल की नियमावली का उल्लंघन होने और सरकारी धन के बड़े पैमाने पर दुरुपयोग का भी जिक्र किया.

ग्यारह टेंडरों की सूची
बाबूलाल ने जिन 11 टेंडरों का हवाला दिया, वे हैं…

जीईएम/2024/B/5748485 (सिविल सर्जन- दुमका)
जीईएम/2024/B/5758754 (सिविल सर्जन- रांची)
जीईएम/2025/B/5895644 (सिविल सर्जन- जामताड़ा)
जीईएम/2025/B/5919778 (सिविल सर्जन- जामताड़ा)
जीईएम/2025/B/5920544 (सिविल सर्जन- बोकारो)
जीईएम/2025/B/6012458 (सिविल सर्जन- बोकारो)
जीईएम/2025/B/6012441 (सिविल सर्जन- बोकारो)
जीईएम/2025/B/6013926 (सिविल सर्जन- दुमका)
जीईएम/2025/B/6017607 (सिविल सर्जन- देवघर)
जीईएम/2025/B/6021839 (सिविल सर्जन- सरायकेला खरसावां)
जीईएम/2025/B/6022047 (सिविल सर्जन- जामताड़ा)

 

बाबूलाल मरांडी का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के कुछ अधिकारियों और मंत्री के संरक्षण में यह घोटाला सुनियोजित तरीके से किया गया। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शी जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है.