महिला आरक्षण को लेकर गरमाई सियासत, भारतीय जनता पार्टी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा को बताया महिला विरोधी

Bokaro: बयान में कहा गया कि कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण का लाभ प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी जैसी परिवार की महिलाओं को मिले. इसी तरह समाजवादी पार्टी पर भी आरोप लगाया गया कि वह महिलाओं के अधिकार की बात तो करती है
 

Bokaro: महिला आरक्षण बिल पर सियासत तेज हो गई है. भाजपा विपक्षी दलों पर परिवारवाद का आरोप लगा रही है. महिला आरक्षण संशोधन बिल लोकसभा में गिरने के बाद भाजपा नेता सभी जिला मुख्यालय में इसको लेकर प्रेस वार्ता कर रहे हैं. बोकारो सर्किट हाउस में बीजेपी राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने महिला आरक्षण संशोधन को लेकर अपनी बातों को रखने का काम किया.

मीडिया से बात करते हुए दीपक प्रकाश ने आरोप लगाया गया है कि कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की मंशा साफ तौर पर सामान्य वर्ग की आम महिलाओं के खिलाफ है और वे केवल अपने परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं.

बयान में कहा गया कि कांग्रेस चाहती है कि महिला आरक्षण का लाभ प्रियंका गांधी और सोनिया गांधी जैसी परिवार की महिलाओं को मिले. इसी तरह समाजवादी पार्टी पर भी आरोप लगाया गया कि वह महिलाओं के अधिकार की बात तो करती है, लेकिन आरक्षण का वास्तविक लाभ किस महिला तक पहुंचेगा, यह साफ नहीं करती.

झारखंड मुक्ति मोर्चा पर आरोप लगाते हुए कहा गया कि वह भी महिलाओं के आरक्षण के पक्ष में दिखती है, लेकिन उसका उद्देश्य भी अपने परिवार की महिला, विशेष रूप से कल्पना सोरेन को लाभ दिलाना है. आरोप है कि ये दल सामान्य वर्ग की साधारण महिलाओं को पीछे रखकर केवल परिवार की महिलाओं को आगे बढ़ाने की राजनीति कर रहे हैं.

चतरा सांसद ने साधा निशाना

नारी शक्ति वंदन को लेकर चतरा सांसद कालीचरण सिंह गढ़वा पहुंचे. सर्किट हाउस मे प्रेसवार्ता कर कहा विपक्ष के चलते पास नहीं हुआ महिला आरक्षण बिल. सर्वदलीय बैठक के बाद भी लोकसभा मे महिला आरक्षण बिल जब पेश किया गया तो विपक्षी पार्टी के सांसदों ने इसे पारित नहीं होने दिया. यह महिलाओं के हक का अपमान है.

इस मौके पर उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा 16 और 17 अप्रैल को सदन मे नारी वंदन अधिनियम बिल लेकर आई थी जिसे कांग्रेस राजद, टीएमसी, सपा, जेएमएम सहित अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसे गिराने का काम किया.

उन्होंने कहा कि एक तरफ विपक्ष की सारी पार्टियां महिला सशक्तिकरण की बात करती है. वहीं दूसरी ओर महिलाओं के 33 प्रतिशत आरक्षण बिल को गिराकर सदन मे नाचते हैं और खुशियां मनाते हैं.