UGC का बड़ा फैसला! 4 साल की UG में 75% अंक वालों के लिए PhD का रास्ता आसान, PG की अनिवार्यता खत्म
Ranchi: रांची विश्वविद्यालय में पीएचडी प्रवेश को लेकर पुरानी व्यवस्था में बदलाव किया गया है। विश्वविद्यालय ने यूजीसी-2022 के प्रावधानों और नई शिक्षा नीति (NEP) के अनुरूप पीएचडी के नए नियम तैयार किए हैं। नई व्यवस्था में चार वर्षीय स्नातक डिग्री करने वाले विद्यार्थियों के लिए शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने का रास्ता आसान किया गया है।
अब चार वर्षीय यूजी में 75 प्रतिशत अंक या निर्धारित समकक्ष सीजीपीए हासिल करने वाले विद्यार्थी पीएचडी में सीधे प्रवेश के लिए पात्र होंगे। ऐसे विद्यार्थियों के लिए पीएचडी में प्रवेश से पहले अलग से पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) करना अनिवार्य नहीं होगा।
75% अंक वालों को सीधे PhD का मौका
रांची विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार राजकुमार शर्मा ने बताया कि नई व्यवस्था यूजीसी-2022 और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों के अनुरूप लागू की जा रही है। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम पूरा करने वाले पात्र विद्यार्थियों को अब पीएचडी में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को होगा, जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सीधे शोध के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। पहले पीजी की डिग्री पूरी करना जरूरी होने के कारण विद्यार्थियों को पीएचडी तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगता था।
मास्टर डिग्री वालों के लिए 55% अंक की पात्रता
नई व्यवस्था में मास्टर डिग्री या एमफिल वाले अभ्यर्थियों के लिए 55 प्रतिशत अंक की पात्रता बरकरार रखी गई है। वहीं आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को पात्रता अंकों में 5 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है।
इसके अलावा चार वर्षीय यूजी में निर्धारित 75 प्रतिशत अंक या समकक्ष सीजीपीए हासिल करने वाले विद्यार्थी सीधे पीएचडी प्रवेश के लिए आवेदन कर सकेंगे।
NET और GATE जैसी परीक्षाओं को भी महत्व
पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में राष्ट्रीय स्तर की पात्रता परीक्षाओं को भी महत्व दिया गया है। NET, CSIR-NET, GATE और संबंधित पात्रता परीक्षाओं में योग्य अभ्यर्थियों को विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा से छूट का प्रावधान किया गया है।
ऐसे अभ्यर्थियों का चयन इंटरव्यू के आधार पर किया जा सकेगा। वहीं विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में शोध पद्धति और संबंधित विषय से जुड़े प्रश्न शामिल किए जाएंगे।
प्रवेश परीक्षा और इंटरव्यू के लिए 70:30 का वेटेज निर्धारित किया गया है। यानी अंतिम चयन में प्रवेश परीक्षा का योगदान 70 प्रतिशत और इंटरव्यू का 30 प्रतिशत होगा।
PhD में 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क जरूरी
पीएचडी में प्रवेश लेने के बाद शोधार्थियों को 12 क्रेडिट का कोर्स वर्क पूरा करना होगा। इसमें शोध पद्धति के साथ शोध से जुड़े विभिन्न अकादमिक पहलुओं की जानकारी दी जाएगी।
नए नियमों के अनुसार पीएचडी की न्यूनतम अवधि तीन वर्ष और अधिकतम अवधि छह वर्ष होगी। विशेष परिस्थितियों में विश्वविद्यालय के निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त समय दिए जाने का प्रावधान भी रखा गया है।
महिला और दिव्यांग शोधार्थियों को अतिरिक्त सुविधा
नई व्यवस्था में महिला शोधार्थियों और 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले शोधार्थियों के लिए निर्धारित नियमों के तहत अतिरिक्त सुविधाओं का प्रावधान किया गया है।
महिला शोधार्थियों को मातृत्व अवकाश और चाइल्ड केयर लीव की सुविधा भी नियमों के अनुसार दी जाएगी। इसका उद्देश्य शोध कार्य के दौरान विद्यार्थियों को आवश्यक सहयोग और अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है।
शोध के इच्छुक छात्रों के लिए बढ़ेंगे अवसर
रांची विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि पीएचडी के नए नियमों से शोध के इच्छुक विद्यार्थियों को अधिक अवसर मिलेंगे। खासकर चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों के लिए बिना पीजी किए सीधे शोध के क्षेत्र में जाने का रास्ता खुल गया है।
नई व्यवस्था को यूजीसी-2022 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप उच्च शिक्षा में बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को कम समय में शोध की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलने की उम्मीद है।