SIR प्रक्रिया को लेकर बड़ा फैसला: झारखंड में तबादलों पर रोक, 50 हजार कर्मियों की होगी तैनाती
Ranchi: झारखंड में होने वाले मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण की जिम्मेदारी राज्य के करीब 50 हजार कर्मचारी-पदाधिकारी पर होगी. जिनकी ट्रांसफर पोस्टिंग बगैर चुनाव आयोग की सहमति से नहीं हो सकेगी. इसकी जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने देते हुए कहा कि 20 जून के बाद से एसआईआर समाप्त होने तक भारत निर्वाचन आयोग की सहमति पर ही ट्रांसफर पोस्टिंग हो सकेगी.
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर आगामी 30 जून से शुरू हो रहे एसआईआर को लेकर आज गुरुवार को मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय में मीडियाकर्मियों के लिए विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला के जरिए मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के प्रावधानों को विस्तार से जानकारी दी गई.
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने इस दौरान मीडियाकर्मियों को बताया कि इससे पहले आयोग द्वारा समय-समय पर कई पुनरीक्षण हुए मगर इस बार जो विशेष गहन पुनरीक्षण हो रहा है, वह काफी महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग का स्पष्ट मानना है कि भारत का नागरिक जिसने 18 वर्ष पूरा किया है और झारखंड में रह रहा है, उसका नाम वोटर लिस्ट में रहेगा. उसकी पहचान के लिए यह प्रक्रिया शुरू की जा रही है.
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं का नाम 2003 की वोटर लिस्ट में है, उन्हें कोई डाक्यूमेंट्स देने की जरूरत नहीं होगी. वर्तमान में चुनाव आयोग की वोटर लिस्ट में जिनका नाम है उनके घर बीएलओ जायेंगे और गणना प्रपत्र भरवाने का काम करेंगे. वैसे युवा जो 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष पूरा करने वाले हैं उन्हें फार्म 6 के साथ घोषणा पत्र और भारत निर्वाचन आयोग से मान्य 11 डाक्यूमेंट्स में से किसी एक को बीएलओ के माध्मम से जमा करना होगा.
उन्होंने कहा कि वैसे वोटर जिनका नाम 2003 के वोटर लिस्ट में दूसरे राज्य में था उन्हें फार्म 8 के जरिए आवेदन देना होगा. यह सभी प्रक्रिया मतदाताओं के घर जाकर बीएलओ करेंगे. इसमें मतदाताओं को कोई भी सरकारी कार्यालय या किसी अन्य जगहों पर दौड़ लगाने की जरूरत नहीं है.
23 मई को अनमैप्ड सूची होगी जारी
आगामी 23 मई को मतदान केंद्रों पर सभी अनमैप्ड मतदाताओं की सूची प्रकाशित की जाएगी. इस सूची में उनके बीएलओ के नाम और नंबर भी छपे होंगे. अनमैप्ड को लेकर पैनिक होने की जरूरत नहीं है बल्कि संबंधित दस्तावेज के आधार पर बीएलओ के माध्यम से वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने का मौका लोगों को मिलेगा. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के अनुसार, बीएलओ अनमैप्ड सूची में शामिल लोगों के घर अधिकतम तीन बार जाकर योग्य मतदाता बनाने की कोशिश करेंगे.
उन्होंने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार, राज्य में 30 जून से घर-घर वोटर का वेरिफिकेशन का काम किया जाएगा, जो 29 जुलाई तक चलेगा. SIR के लिए राज्य में 50 हजार कर्मचारी पदाधिकारी लगेंगे. उसमें सीईओ ऑफिस से लेकर पांच प्रमंडलीय आयुक्त, 24 जिला निर्वाचन पदाधिकारी, 81 सहायक निर्वाचन पदाधिकारी, 340 उप निर्वाचन पदाधिकारी, 80 अतिरिक्त एईआरओ, 32 हजार बीएलओ आदि लगाए जायेंगे. जिनपर 2,64,89,777 मतदाताओं की पहचान करने की जिम्मेदारी होगी.
चुनाव आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के अनुसार, 29 जुलाई को मतदान केंद्रों का पुनरीक्षण होगा और 5 अगस्त को मतदाता सूची का ड्राफ्ट पब्लिकेशन होगा. 5 अगस्त से 4 सितंबर तक मतदाता सूची को लेकर आपत्ति दर्ज की जा सकेगी. वहीं 5 अगस्त से लेकर 3 अक्टूबर तक आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा. मतदाता सूची का प्रकाशन 07 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा.
झारखंड में होने वाले एसआईआर में आधार का उपयोग सिर्फ पहचान की प्रमाणिकता के लिए होगी ना कि इससे नागरिकता प्रमाणित होगी. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने इसकी जानकारी देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण में शामिल 12 दस्तावेज में आधार सिर्फ पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पता या जन्मतिथि की नहीं है.
ये दस्तावेज जरूरी
- केंद्र सरकार/राज्य सरकार/पीएसयू के नियमित कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र/पेंशन भुगतान आदेश (PPO)
- 01.07.1987 से पहले भारत में सरकारी/स्थानीय अधिकारियों/बैंकों/डाकघर/एलआईसी/पीएसयू द्वारा जारी किया गया कोई भी पहचान पत्र/प्रमाण पत्र/दस्तावेज
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र
- पासपोर्ट
- मान्यता प्राप्त बोर्डों/विश्वविद्यालयों द्वारा जारी मैट्रिक/शैक्षणिक प्रमाण पत्र
- सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी किया गया स्थायी निवास प्रमाण पत्र
- वन अधिकार प्रमाण पत्र
- सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी/एससी/एसटी या कोई भी जाति प्रमाण पत्र
- राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां भी यह मौजूद है)
- राज्य/स्थानीय अधिकारियों द्वारा तैयार किया गया परिवार रजिस्टर
- सरकार द्वारा कोई भी जमीन/मकान आवंटन प्रमाण पत्र
- आधार के लिए, आयोग के निर्देश जो पत्र संख्या 23/2025 ईआरएस/वोलिल दिनांक 09.09.2025 (अनुलग्नक II) द्वारा जारी किए गए हैं, लागू होंगे
- यदि आपका नाम 2003 के वोटर लिस्ट में झारखंड से बाहर के दूसरे राज्य में है तो वहां के वोटर लिस्ट की क्रम संख्या, विधानसभा और जिला को दर्शाता फोटो कॉपी
- पैरेंटल मैंपिंग से बाहर के वोटर के बच्चे जो नए वोटर बनने वाले हैं, उन्हें शपथ पत्र के साथ पैरेंटल मैपिंग के लिए दस्तावेज देना होगा.
भारत का नागरिक कौन? चुनाव आयोग ने किया स्पष्ट
एसआईआर के दौरान भारत का नागरिक कौन है, यह बहस छिड़ता रहता है. भारत निर्वाचन आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है. 26 जनवरी 1950 से पूर्व देश में रहने वाले या जन्म लेने वाले सभी नागरिकों के अलावे 26 जनवरी 1950 से 1.7.1987 तक देश में जन्म लेने वाले सभी नागरिक भारतीय होंगे. इसके अलावे 01.07.1987 से लेकर 02.12.2004 तक के वैसे व्यक्ति जिनके माता-पिता में से कोई एक भारतीय हो, देश का नागरिक होगा. 02.12.2004 के बाद जन्म लेने वाले वैसे व्यक्ति जिनके या तो माता-पिता भारतीय हो या एक भारतीय और दूसरा जन्म के समय विदेशी नागरिक हो.