रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी खबर! टिकट नहीं मिलने पर भी मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश

Jharkhand:  सुप्रीम कोर्ट ने रेल हादसे में मुआवजे को लेकर अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि मृत यात्री के पास से टिकट नहीं मिलने मात्र से उसके परिवार का मुआवजे का दावा खारिज नहीं किया जा सकता. गुजरात के महेशभाई मामले में कोर्ट ने उनके माता-पिता को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश बहाल कर दिया...
 

Jharkhand: सुप्रीम कोर्ट ने रेल हादसे में मुआवजे को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी मृत रेल यात्री के पास से टिकट बरामद नहीं होने मात्र से उसके परिवार के मुआवजे के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। शीर्ष अदालत ने गुजरात में ट्रेन से गिरकर जान गंवाने वाले महेशभाई के माता-पिता को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश बहाल कर दिया है।

न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और न्यायमूर्ति एएस चंदुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए रेलवे को मुआवजे की राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया।

ट्रेन से गिरने के बाद हुई थी महेशभाई की मौत

मामला 27 सितंबर 2017 का है। महेशभाई अहमदाबाद से सूरत जा रहे थे। यात्रा के दौरान ट्रेन में अचानक झटका लगने के कारण वह सामान्य डिब्बे से नीचे गिर गए। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आईं।

घटना के बाद महेशभाई का इलाज कराया गया, लेकिन करीब एक महीने से अधिक समय बाद 31 अक्टूबर 2017 को उनकी मौत हो गई। इसके बाद उनके माता-पिता ने रेलवे से मुआवजे की मांग की।

टिकट नहीं मिलने को बनाया गया था आधार

मुआवजे के दावे पर यह सवाल उठाया गया कि महेशभाई के पास से यात्रा का टिकट बरामद नहीं हुआ था। इसी आधार पर उनके परिवार के दावे पर आपत्ति की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि महेशभाई के पिता ने शपथ लेकर बयान दिया था कि उनके बेटे ने यात्रा के लिए टिकट खरीदा था। इसे गलत साबित करने की जिम्मेदारी रेलवे पर थी, लेकिन रेलवे ऐसा कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका।

पीठ ने यह भी माना कि हादसे के बाद लंबे समय तक चले इलाज के दौरान टिकट के सुरक्षित रहने की संभावना कम हो सकती है। इसलिए केवल टिकट बरामद नहीं होने के आधार पर मृतक को बिना टिकट यात्री मानना उचित नहीं है।

जांच में देरी का लाभ रेलवे को नहीं मिलेगा

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की जांच में हुई देरी पर भी टिप्पणी की। कोर्ट के अनुसार हादसा सितंबर 2017 में हुआ था, जबकि रेलवे की जांच रिपोर्ट करीब सात महीने बाद तैयार हुई।

पीठ ने कहा कि जांच में हुई देरी के लिए दावेदारों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। रेलवे अपनी जांच में हुई देरी का लाभ लेकर पीड़ित परिवार के मुआवजे के दावे को खारिज नहीं कर सकता।

गुजरात हाईकोर्ट का आदेश रद्द

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात हाईकोर्ट के आदेश को रद्द करते हुए महेशभाई के माता-पिता को 8 लाख रुपये मुआवजा देने का पूर्व आदेश बहाल कर दिया। रेलवे को यह राशि 30 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।

इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि रेल हादसे में मुआवजे के दावे का फैसला केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि मृतक के पास से यात्रा का टिकट बरामद हुआ या नहीं। मामले के उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना होगा।