जल जीवन मिशन और PM आवास योजना पर बड़ा सवाल, झारखंड में अयोग्य ठेकेदारों को 159 करोड़ के टेंडर

Ranchi: CAG के अनुसार, ODF घोषित झारखंड में पूर्ण हो चुके करीब 8% पीएम आवासों में शौचालय का निर्माण नहीं हुआ. इन मामलों ने टेंडर प्रक्रिया, लाभार्थी चयन और योजनाओं की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
 

Ranchi: झारखंड में केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं जल जीवन मिशन (JJM) और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के क्रियान्वयन को लेकर CAG की ऑडिट रिपोर्ट में गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में टेंडर आवंटन में नियमों की अनदेखी, पात्र लाभार्थियों के चयन में खामियों और योजनाओं की निगरानी पर सवाल उठाए गए हैं।

अयोग्य संवेदक को 159 करोड़ रुपये तक के टेंडर

CAG की रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने एक ऐसे संवेदक को कई काम आवंटित किए, जिसकी निविदा क्षमता नियमों के अनुसार पर्याप्त नहीं थी। रिपोर्ट में बताया गया है कि संबंधित ठेकेदार ने वित्तीय वर्ष 2021-22 में केवल 5.60 करोड़ रुपये का सिविल कार्य दिखाया था। इसके आधार पर उसकी टेंडर क्षमता शून्य बनती थी।

इसके बावजूद उसे सात टेंडर में 54.05 करोड़ रुपये के काम दिए गए। रिपोर्ट के मुताबिक, कुल मिलाकर संबंधित संवेदक को 159.36 करोड़ रुपये तक के टेंडर आवंटित किए गए। CAG ने इस प्रक्रिया में नियमों के पालन और विभागीय निगरानी पर सवाल उठाए हैं।

केवल दो संवेदकों ने लिया टेंडर में हिस्सा

ऑडिट के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित निविदा प्रक्रिया में केवल दो संवेदकों ने भाग लिया। CAG ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर स्थिति की समीक्षा की और नियमों के अनुरूप निविदा क्षमता निर्धारित किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

28% पात्र परिवार PM आवास से वंचित

प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के ऑडिट में लाभार्थियों के चयन और योजना के लक्ष्य निर्धारण को लेकर भी गंभीर खामियां सामने आयी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड में 22.34 लाख पात्र ग्रामीण परिवारों की पहचान की गयी थी, लेकिन केंद्र से राज्य को केवल 16.02 लाख आवासों का लक्ष्य मिला।

इस अंतर के कारण करीब 6.32 लाख पात्र परिवार, यानी लगभग 28 प्रतिशत, योजना के लाभ से वंचित रह गए।

प्रतीक्षा सूची में 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम

CAG रिपोर्ट में लाभार्थियों की सूची में भी अनियमितता का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, PMAY-G की प्रतीक्षा सूची में करीब 2.90 लाख अपात्र लोगों के नाम शामिल किए गए थे। बाद में जांच के दौरान इन नामों को हटाया गया।

यह स्थिति योजना में लाभार्थियों के चयन और डेटा प्रबंधन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती है।

8% पीएम आवासों में शौचालय नहीं

ऑडिट में आवास निर्माण की गुणवत्ता और योजना के समन्वय को लेकर भी सवाल सामने आए। CAG के अनुसार, झारखंड को ODF घोषित किए जाने के बावजूद पूर्ण हो चुके करीब 8 प्रतिशत पीएम आवासों में शौचालय का निर्माण नहीं किया गया

रिपोर्ट में यह स्थिति योजना की निगरानी और विभिन्न सरकारी योजनाओं के बीच समन्वय की कमी की ओर संकेत करती है।

योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी पर सवाल

CAG की रिपोर्ट में सामने आये इन मामलों से जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के टेंडर आवंटन, लाभार्थी चयन, लक्ष्य निर्धारण और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठते हैं। रिपोर्ट में बतायी गयी अनियमितताओं के आधार पर संबंधित विभागों की प्रक्रियाओं में सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत सामने आती है।