सावधान! एक गलती आपको और आपके परिवार को कर सकती है बर्बाद, भारत ही नहीं अब अमेरिकी लोग भी हो रहे ठगी का शिकार

 

Jharkhand Desk: साइबर अपराध एक सामान्य शब्द जरूर लगता लेकिन इसका शिकार जो भी व्यक्ति होता है उसकी दुनिया मनो खत्म हो जाती है. आजकल के आधुनिक युग में जहां चीजें आसान हो चुकी है मगर सच पुछा जाये तो ये हमारी आपकी ज़िन्दगी को बर्बाद कर रही है. कहते हैं ना कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है. ये दुनिया तक वैसी ही है. एक चूक और सबकुछ बर्बाद. उसके बाद अफसोस के अलावा हम कुछ भी नहीं कर सकते.   


एक बार फिर से झारखंड सायबर ठगी को लेकर सुर्खियों में है. कभी जामताड़ा देशभर में “फिशिंग कैपिटल” के नाम से बदनाम हुआ था, अब जमशेदपुर शहर से अमेरिका तक ठगी का जाल फैलने की खबर ने सबको चौंका दिया है. साइबर अपराधियों का नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है. जी हां, ताजा मामला जमशेदपुर से सामने आया है, जहां के साइबर अपराधियों ने अमेरिका के 12 नागरिकों को ठगी का शिकार बनाया है. पीड़ित अमरीकी नागरिकों ने वहां के पुलिस थाना में इसकी शिकायत दर्ज की है. इसके बाद भारत के विदेश मंत्रालय ने जाँच एजेंसी को यह मामला सौंपा है.

दरअसल, अमेरिका में रहने वाले कई लोगों ने ऑनलाइन ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी. जब अमेरिकी एजेंसियों ने इसकी जांच की तो हैरानी की बात सामने आई कि ठगी के पीछे जमशेदपुर के नंबर इस्तेमाल किए गए थे. यह जानकारी विदेश मंत्रालय तक पहुंची और इसके बाद जमशेदपुर पुलिस तुरंत हरकत में आ गई.

अलर्ट एक्शन में पुलिस 
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने सभी डीएसपी और थाना प्रभारियों को सख्त अलर्ट जारी किया. जांच में सामने आया कि शहर के कई इलाकों- साकची, मानगो, टेल्को, गोविंदपुर और बारिडीह से इस पूरे नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था. अब तक 12 ठगों की पहचान हो चुकी है और जल्द ही इनके खिलाफ बड़ी कार्रवाई होने वाली है.

कैसे घटना को देते थे अंजाम 
ये ठग खुद को टेक्निकल सपोर्ट एजेंट, बैंक अधिकारी या सरकारी संस्था का एजेंट बताकर अमेरिकी नागरिकों को कॉल करते थे. भरोसा दिलाने के बाद वे लोगों से बैंक डिटेल्स या ऑनलाइन पेमेंट के जरिए पैसे हड़प लेते थे. यानी ठगी का तरीका वही पुराना था, लेकिन टारगेट इस बार भारत के बजाय अमेरिका के लोग थे.

सायबर ठगी का गढ़ बना जामताड़ा 
जामताड़ा की कहानियां देशभर में मशहूर हैं. वहीं, अब ठगी का ये नेटवर्क जमशेदपुर और अन्य जिलों तक फैल चुका है. जामताड़ा, देवघर, गिरिडीह, धनबाद, कोडरमा और रांची जैसे जिलों में भी बड़े पैमाने पर सायबर गिरोह सक्रिय हैं. पुलिस और सीआईडी लगातार कार्रवाई कर रही है, लेकिन नए-नए नेटवर्क हर बार सामने आ जाते हैं.

इंटरनेशनल लूट-पाट का सबसे बड़ा हब
झारखंड अब केवल देश में ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल लेवल पर भी सायबर ठगी का सबसे बड़ा हब बनता दिख रहा है. सवाल यह है कि क्या पुलिस और एजेंसियां इस पर पूरी तरह से लगाम लगा पाएंगी या फिर जामताड़ा की तरह जमशेदपुर का नाम भी “सायबर क्राइम सिटी” के रूप में पहचाना जाएगा.

किसी भी घटना को नजरअंदाज ना करें 
डिजिटल अपराध छिटपुट घटनाओं से विकसित होकर एक परिष्कृत भूमिगत अर्थव्यवस्था में बदल गया है जो समाज के हर पहलू तक पहुँच रहा है और व्यक्तियों से लेकर बड़ी कंपनियों तक, सभी को प्रभावित कर रहा है. साइबर अपराध ऐसे अपराध होते हैं जो कंप्यूटर, इंटरनेट या मोबाइल टेक्नोलॉजी का उपयोग करके व्यक्तियों, कंपनियों या संस्थाओं को लक्ष्य बना रहे हैं. किसी को भी अपनी निजी जानकारी देने स बचें.