शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहा चतरा का बालिका उच्च विद्यालय, एक शिक्षक पर सौ से ज्यादा छात्राओं का बोझ
Chatra: जिले के राज्य संपोषित बालिका उच्च विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था इन दिनों गंभीर संकट से गुजर रही है. विद्यालय में छात्राओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षकों और आधारभूत सुविधाओं की भारी कमी के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. आलम यह है कि 1,435 छात्राओं की पढ़ाई मात्र 9 शिक्षकों के भरोसे संचालित हो रही है. इससे न केवल शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव बढ़ गया है, बल्कि छात्राओं की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा भी प्रभावित हो रही है. विद्यालय में शिक्षकों की कमी लंबे समय से बनी हुई है.
विभिन्न विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं होने के कारण कई विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पा रही है. एक-एक शिक्षक को कई कक्षाओं और विषयों की जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है. इसका सीधा असर छात्राओं की पढ़ाई और परीक्षा परिणाम पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
कमरों की भी भारी कमी
सिर्फ शिक्षक ही नहीं, विद्यालय में कमरों की भी भारी कमी है. स्थिति यह है कि एक ही कमरे में दो-दो सेक्शन के छात्राओं को बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है. इससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है. कक्षा में अत्यधिक भीड़ होने के कारण छात्राओं को बैठने में परेशानी होती है और शिक्षक भी सही ढंग से पढ़ाने में असहज महसूस करते हैं. कई बार शोर-शराबे और जगह की कमी के कारण छात्राएं पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पातीं.
विद्यालय में अध्ययनरत छात्रा पूजा कुमारी ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की भारी कमी है. इसके बावजूद शिक्षक किसी तरह बच्चों को पढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई विषयों की पढ़ाई प्रभावित होती है, जिससे छात्राओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं छात्रा कनक कुमारी ने कहा कि विद्यालय में कमरों का अभाव है. एक ही कक्षा में दो सेक्शन के बच्चों को बैठाने से काफी परेशानी होती है. भीड़ अधिक होने के कारण पढ़ाई का माहौल सही नहीं बन पाता.
विभागीय अधिकारियों को दी गई जानकारी
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका नीतू कुमारी ने बताया कि शिक्षकों की कमी की जानकारी विभागीय वरीय अधिकारियों को कई बार दी जा चुकी है. विद्यालय प्रबंधन लगातार इस समस्या के समाधान की मांग कर रहा है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि विद्यालय में छात्राओं की संख्या काफी अधिक है, ऐसे में पर्याप्त शिक्षक और अतिरिक्त कमरों की व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है. उन्होंने उम्मीद जताई कि विभाग जल्द इस दिशा में ठोस कदम उठाएगा ताकि छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
विधायक ने भी जताई चिंता
इस मामले पर स्थानीय विधायक जनार्दन पासवान ने भी चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि केवल इस विद्यालय की ही नहीं, बल्कि जिले के अधिकांश विद्यालयों की स्थिति लगभग ऐसी ही है. कई स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है तो सरकार को जल्द से जल्द विद्यालयों में विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति करनी होगी. साथ ही आधारभूत सुविधाओं को भी बेहतर बनाना होगा, तभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल पाएगी.
स्थानीय अभिभावकों का कहना है कि सरकार शिक्षा सुधार के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है. छात्राओं की संख्या बढ़ने के बावजूद विद्यालयों में शिक्षक और संसाधन नहीं बढ़ाए जा रहे हैं. इसका खामियाजा सीधे तौर पर बच्चों के भविष्य पर पड़ रहा है. अभिभावकों ने जल्द शिक्षकों की नियुक्ति और नए कमरों के निर्माण की मांग की है.