वन महोत्सव में CM हेमंत सोरेन की अपील, हर व्यक्ति लगाए एक फलदार या उपयोगी वृक्ष, बताया जनक्रांति का रास्ता

Ranchi: मुख्यमंत्री ने कहा कि महुआ, कटहल, जामुन और करंज जैसे स्थानीय वृक्ष केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका, पोषण और जैव विविधता को भी मजबूत करते हैं. उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने और उनके संरक्षण की अपील की.
 

Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वन महोत्सव कार्यक्रम में लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक फलदार या स्थानीय उपयोगी वृक्ष अवश्य लगाए और उसकी देखभाल अपने परिवार के सदस्य की तरह करे। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि हजारों लोग एक-एक पेड़ लगाकर उसे जीवित रखने का संकल्प लें, तो यह किसी भी सरकारी अभियान से बड़ी जनक्रांति साबित होगी।

महुआ, कटहल और जामुन जैसे पेड़ों को बताया ग्रामीण विकास का आधार

मुख्यमंत्री ने कहा कि महुआ, कटहल, जामुन और करंज जैसे स्थानीय वृक्ष केवल हरियाली बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका, पोषण और जैव विविधता को भी मजबूत करते हैं। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाने और उनके संरक्षण की अपील की।

पेड़ लगाने वालों को मिल रही प्रोत्साहन योजनाएं

हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार शहरी क्षेत्रों में हरित आवरण बढ़ाने के लिए कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। उन्होंने बताया कि पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने वालों के लिए निःशुल्क बिजली जैसी प्रोत्साहन योजनाएं भी शुरू की गई हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि किसी भी योजना से बड़ा प्रोत्साहन लोगों की अपनी पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी है।

जल, जंगल और जमीन की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर नागरिक का साझा दायित्व है। उन्होंने लोगों से जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि यदि समाज सामूहिक रूप से वृक्षारोपण और उनके संरक्षण का संकल्प लेता है, तो वन महोत्सव का उद्देश्य सही मायनों में सफल होगा और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं हरित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकेगा।

पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की अपील

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि वन महोत्सव केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे जन आंदोलन का रूप देना होगा। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करें और पर्यावरण संरक्षण को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। यही झारखंड के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास की दिशा में सबसे बड़ा कदम होगा।