कहीं अंश और अंशिका के लापता होने की वजह ये तो नहीं? एक ऐसा केस जिसमें पुलिस को अबतक नहीं मिला कोई लीड?
Jharkhana Desk: झारखंड की राजधानी रांची के धुर्वा थाना क्षेत्र का मौसीबाड़ी इलाके में बच्चे खेलते हुए दिखाई तो देते हैं, लेकिन अब वे बेपरवाह नहीं हैं. अभिभावक उन्हें अपनी नजरों से ओझल नहीं होने दे रहे हैं जो इस इलाके में पहले नहीं होता था. वहीं अंश और अंशिका का पता अबतक नहीं चल पाया है, जिसे लेकर पुलिस की जांच भी जारी है. रांची सीटी एसपी पारस राणा ने बताया कि पुलिस की टीम बिहार, बंगाल और उड़ीसा के साथ हर उस लोकेशन पर बच्चों की जानकारी जुटाने में लगी है जहां उनके होने की जरा सी भी उम्मीद है. रांची सीटी एसपी का कहना है ह्यूमन ट्रैफिकिंग और चाइल्ड ट्रैफिकिंग में लिप्त हर संदिग्ध के डेटा को खंगाला जा रहा है. वहीं पुलिस आम लोगों से भी बच्चों को ढूंढने की अपील कर रही है.
अब तक क्या हुआ?
बीते 2 जनवरी को लापता हुए 5 वर्षीय अंश और 4 वर्षीय अंशिका गायब हो गए जिसके बाद से परिजन बच्चों को ढूंढने में जुटे. वहीं पुलिस के द्वारा भी एसआईटी बनाई गई. पुलिस के द्वारा बच्चों का पोस्टर जारी किया गया. तीन राज्यों में पुलिस की टीम भेजी गई. डॉग स्क्वायड की टीम मौसीबाड़ी इलाके में लगातार सर्च में जुटी. 2 जनवरी को इलाके में एक्टिव फोन का ट्रेस किया जा रहा है. 2 जनवरी को इलाके से निकली हर गाड़ी को खंगाला गया. अब तक 200 लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. वहीं अब पुलिस राज्य में एक्टिव चाइल्ड और ह्यूमन ट्रैफिकर की जांच में जुटी है. पिछले 10 वर्षों में जो भी संदिग्ध ट्रैफिकिंग में लिप्त पाए गए हैं उनके डेटा को खंगाला जा रहा है. महानगरों में बच्चों का अडॉप्शन बढ़ा, ऐसे में झारखंड जैसे राज्यों के बच्चों की हो रही चोरी.
10 दिन बाद भी गायब अंश-अंशिका, परिवार सदमे में
इस मामले पर बच्चों की ट्रैफिकिंग पर कार्य करने वाले बैजनाथ कुमार बताते हैं बच्चों का अबतक पता नहीं चलना दुखद है. पुलिस पर सवाल तो उठते हैं लेकिन साथ ही जरूरी है कि चाइल्ड ट्रैफिकिंग से जुड़े वे लोग जो जेल से बाहर आए हैं या फिलहाल जेल में हैं, उनसे पूछताछ की जाए ताकि कोई जानकारी सामने आ पाए. उन्होंने बताया कि वर्तमान में महानगरों में बच्चों को एडॉप्ट करने का चलन बढ़ा है और इस कारण आर्थिक रूप से कमजोर राज्यों के बच्चे आज महानगरों में किसी दंपती की गोद में बेचे जा रहे हैं और यही वजह है कि अस्पतालों से नवजात बच्चों की चोरी की संख्या में इजाफा हुआ है.