घाटशिला में खतरा टला: लगातार तीसरे बम को किया गया डिफ्यूज, सेना की मुस्तैदी से टला बड़ा हादसा...

East Singhbhum: जैसे ही बम को विस्फोट कर डिफ्यूज किया गया, पूरे इलाके में जोरदार धमाका हुआ. आग और धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता नजर आया. हालांकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के कारण किसी प्रकार की जानमाल की हानि नहीं हुई. इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला.
 

East Singhbhum: झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत पानीपोड़ा गांव इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है. आसपास गांव के ग्रामीण दहशत के माहौल में जी रहे हैं. दरअसल पानीपड़ा गांव के समीप स्वर्णरेखा नदी से एक के बाद एक तीन जिंदा अमेरिका मेड बम मिलना कारण है. बम कहां से आया, यह किसी को जानकारी नहीं है.

द्वितीय विश्व युद्ध के समय गिरा था बम

ग्रामीणों के अनुसार अंग्रेजों के जमाने में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान क्षेत्र में हवाई जहाज के माध्यम से कई बम को नीचे गिराया गया था. हालांकि जमीन के ऊपर जो भी बम मिले, उनको उठाकर अपने साथ ले गए और पानी के अंदर जो स्वर्णरेखा नदी में गिरा था, उसे ब्रिटिश सेना नहीं खोज सकी थी. जिसके बाद खुदाई के दौरान एक के बाद एक लगातार तीन अमेरिकन मेड बम को बरामद किया गया है.

इन बमों पर AN-M64 लिखा हुआ है. इन बमों का इस्तेमाल अमेरिका की एयरफोर्स और नेवी द्वितीय विश्वयुद्ध और कोरिया युद्ध के समय करती थी. इसका इस्तेमाल बारुद के भंडारों, विमानों और इमारतों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता था.

बम को डिफ्यूज करने के लिए भारतीय सेना के कर्नल धर्मेंद्र सिंह और कैप्टन आयुष कुमार सिंह के नेतृत्व में विशेष टीम मौके पर पहुंची थी. उनके साथ स्थानीय प्रशासन और पुलिस के अधिकारी भी मौजूद रहे. इस दौरान घाटशिला एसडीपीओ अजीत कुजूर और थाना प्रभारी शंकर प्रसाद कुशवाहा ने सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी की.

सेना ने बम डिफ्यूज करने से पहले पूरे क्षेत्र में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था लागू की. करीब एक किलोमीटर के दायरे में लोगों के आने-जाने पर रोक लगा दी गई. आसपास के ग्रामीणों को सुरक्षित दूरी पर रखा गया. मौके पर अग्निशमन दल और एम्बुलेंस की भी व्यवस्था की गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके. भारतीय सेना के जवानों ने बम को निष्क्रिय करने के लिए नई और सुरक्षित तकनीक अपनाई. नदी किनारे रेत में गड्ढा खोदकर बम को जमीन के अंदर रखा गया और नियंत्रित तरीके से डेटोनेटर के माध्यम से विस्फोट किया गया.

कब कितने बम मिले

  • पहला बम 17 मार्च 2026 को स्वर्ण रेखा नदी में बालू के अवैध खुदाई के दौरान मिला.
  • दूसरा बम 24 मार्च 2026 को मिला यह गांव के एक ग्रामीण के घर से बरामद किया गया था.
  • ग्रामीण ने बताया था कि स्वर्णरेखा नदी में भारी भरकम लोहा का सामान मिला था, जिसे मैं घर में लाकर रखा था.
  • तीसरा बम 17 अप्रैल को गांव के कुछ लोग रात को मछली पकड़ने के लिए गए थे. तभी नदी में लोगों को दिखाई दिया.
  • गर्मी के कारण नदी का जलस्तर कम हो जाने से लोगों की नजर बम पर गई और पुलिस को सूचित किया.

धमाके से दहला इलाका, उठा धुएं का गुबार

जैसे ही बम को विस्फोट कर डिफ्यूज किया गया, पूरे इलाके में जोरदार धमाका हुआ. आग और धुएं का बड़ा गुबार आसमान में उठता नजर आया. हालांकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के कारण किसी प्रकार की जानमाल की हानि नहीं हुई. इस पूरे ऑपरेशन में भारतीय सेना और स्थानीय प्रशासन के बीच बेहतरीन समन्वय देखने को मिला. सेना के अधिकारियों ने पुलिस बल को पहले ही जरूरी प्रशिक्षण और निर्देश दिए थे. जिससे ऑपरेशन पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पूरा किया जा सका.

बम डिफ्यूज होने के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली. लंबे समय से बना भय का माहौल अब समाप्त हो गया है. प्रशासन ने भी लोगों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध वस्तु की सूचना जिला प्रशासन को तुरंत देने की अपील की है.