MMDR संशोधन बिल पर झारखंड में ‘साथ’ होकर भी अलग-अलग आंदोलन, INDIA ब्लॉक की एकजुटता पर उठे सवाल
Ranchi, Jharkhand News: झारखंड में MMDR संशोधन बिल को लेकर सियासत लगातार गरमा रही है। राज्य की सत्ता में शामिल झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा-माले इस संशोधन को झारखंड के हितों के खिलाफ बताते हुए इसके विरोध में आवाज उठा रहे हैं। हालांकि, विरोध के मुद्दे पर चारों दलों की राजनीतिक लाइन भले एक जैसी नजर आ रही हो, लेकिन आंदोलन के मोर्चे पर अब तक इनकी साझा तस्वीर सामने नहीं आई है।
सत्ताधारी गठबंधन के सहयोगी दल अपने-अपने स्तर पर केंद्र सरकार के खिलाफ कार्यक्रम और अभियान चला रहे हैं। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठने लगा है कि जब MMDR बिल को सभी दल झारखंड के अधिकार और अस्मिता से जोड़कर देख रहे हैं, तो फिर एक मंच से विरोध दर्ज कराने में देरी क्यों हो रही है।
क्या अलग-अलग आंदोलन के पीछे है राजनीतिक खींचतान?
झारखंड में INDIA गठबंधन की सरकार होने के बावजूद MMDR के मुद्दे पर घटक दलों की अलग-अलग गतिविधियों ने गठबंधन के बीच समन्वय को लेकर चर्चा तेज कर दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि कहीं इस मुद्दे पर राजनीतिक बढ़त हासिल करने की होड़ तो नहीं है।
हालांकि, गठबंधन के नेताओं ने क्रेडिट की राजनीति से इनकार किया है और दावा किया है कि सभी दल अपने-अपने संगठनात्मक स्तर पर केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं। जरूरत पड़ने पर साझा आंदोलन की बात भी कही जा रही है।
‘INDIA गठबंधन अभी निर्माण के दौर में’—शुभेंदु सेन
भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता शुभेंदु सेन का मानना है कि झारखंड में INDIA गठबंधन अभी पूरी तरह संस्थागत रूप नहीं ले पाया है। उनके मुताबिक गठबंधन को मजबूत करने और सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने MMDR कानून के मुद्दे पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। शुभेंदु सेन का कहना है कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि झारखंड के अधिकारों से जुड़ा सवाल है। इसलिए सभी घटक दलों को साथ बैठकर आगे की रणनीति तय करनी चाहिए।
राजनीतिक श्रेय लेने की संभावित होड़ पर उन्होंने कहा कि गठबंधन का मूल उद्देश्य भाजपा को झारखंड की सत्ता में दोबारा आने से रोकना है। हालांकि कई मुद्दों पर सहयोगी दलों के बीच मतभेद हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि भाकपा-माले जल्द ही धनबाद में बड़ा कार्यक्रम भी करने जा रही है।
कांग्रेस बोली- जरूरत पड़ी तो साझा आंदोलन करेंगे
कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि पार्टी MMDR संशोधन के खिलाफ लगातार आंदोलन कर रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर सहयोगी दलों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन भी किया जाएगा।
कांग्रेस नेता ने इस कानून के विरोध को झारखंडी अस्मिता और सम्मान से जोड़ते हुए कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर समझौता नहीं करेगी। उन्होंने माना कि फिलहाल झामुमो, कांग्रेस, भाकपा-माले और राजद अपने-अपने स्तर पर कार्यक्रम कर रहे हैं।
राकेश सिन्हा के मुताबिक अलग-अलग आंदोलनों को केंद्र सरकार पर अलग-अलग दिशाओं से बनाया जा रहा दबाव भी माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के अगले चरण में सभी सहयोगी दल एक मंच पर आ सकते हैं। उनके अनुसार, यहां किसी दल के बीच क्रेडिट लेने की होड़ नहीं है।
झामुमो ने भी दिया संयुक्त आंदोलन का संकेत
झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि MMDR कानून के खिलाफ राज्य के लोगों में नाराजगी है। प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक पार्टी इस मुद्दे को लेकर अभियान चलाने की तैयारी कर रही है।
उन्होंने कहा कि फिलहाल गठबंधन में शामिल सभी दल अपनी संगठनात्मक क्षमता और जनाधार के हिसाब से अलग-अलग कार्यक्रम कर रहे हैं। लेकिन अगर जरूरत महसूस हुई तो सभी सहयोगी दल साझा रणनीति के तहत एकजुट होकर मैदान में उतरेंगे।
मनोज पांडेय ने दावा किया कि झारखंड में INDIA गठबंधन मजबूत है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में सभी घटक दल सरकार के साथ हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के विधायक और अन्य सहयोगी दल भी गठबंधन को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभा रहे हैं।
आगे बढ़ सकता है साझा अभियान
MMDR संशोधन बिल पर फिलहाल झारखंड में सत्ता पक्ष के चारों दलों की आवाज एक है, लेकिन आंदोलन का तरीका अलग-अलग है। नेताओं के बयानों से संकेत मिल रहा है कि आने वाले दिनों में विरोध का दायरा बढ़ सकता है और सभी दल किसी साझा मंच से केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि MMDR बिल के विरोध में INDIA गठबंधन के घटक दल कब तक अलग-अलग कार्यक्रम करते हैं और कब एक साझा रणनीति के साथ बड़े आंदोलन की घोषणा करते हैं।