5 मिनट में तबाही: झारखंड एयर एम्बुलेंस क्रैश पर AAIB की शुरुआती रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

 
Jharkhand News: झारखंड में 23 फरवरी को हुए दर्दनाक एयर एम्बुलेंस हादसे ने अब कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच में सामने आया है कि खराब मौसम और तेजी से बदलते हालात ने महज कुछ मिनटों में एक सुरक्षित उड़ान को हादसे में बदल दिया।

उड़ान के कुछ मिनट बाद ही टूटा संपर्क

बीचक्राफ्ट किंग एयर C90 विमान रांची से दिल्ली के लिए एयर एम्बुलेंस के तौर पर रवाना हुआ था। शाम 7:07 बजे टेकऑफ के बाद सब कुछ सामान्य था, लेकिन 7:19 बजे एयर ट्रैफिक कंट्रोल से आखिरी बातचीत हुई और इसके करीब 5 मिनट बाद ही 7:24 बजे चतरा जिले में विमान क्रैश हो गया। इस हादसे में सवार सभी 7 लोगों दो पायलट, मेडिकल स्टाफ, मरीज और अटेंडेंट की मौत हो गई।

मौसम बना सबसे बड़ा ‘विलेन’

जांच रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के वक्त इलाके में मौसम बेहद खराब था। गरज-चमक के साथ बारिश, घने क्यूम्यूलोनिंबस बादल और कम विज़िबिलिटी (करीब 3500 मीटर) ने उड़ान को जोखिम भरा बना दिया था। पायलट लगातार हालात से बचने की कोशिश में रूट बदलते रहे, ऊंचाई घटाने-बढ़ाने की अनुमति लेते रहे लेकिन अंततः हालात काबू से बाहर हो गए।

ब्लैक बॉक्स नहीं, जांच और मुश्किल

इस केस की जांच को जटिल बनाने वाली एक बड़ी बात यह भी है कि विमान में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर और कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (ब्लैक बॉक्स) मौजूद नहीं था। इतना ही नहीं, हादसे के बाद इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) भी सक्रिय नहीं हुआ, जिससे दुर्घटनास्थल तक पहुंचने में देरी हुई।

मलबे ने बताई टक्कर की भयावहता

क्रैश के बाद विमान पूरी तरह तबाह हो गया। उसके टुकड़े करीब एक किलोमीटर तक बिखरे मिले। इंजन और टेल सेक्शन का अलग मिलना इस बात का संकेत है कि टक्कर बेहद तेज और घातक थी।

कई एंगल पर जांच जारी

AAIB ने साफ किया है कि यह सिर्फ शुरुआती रिपोर्ट है। हादसे के पीछे की असली वजह अभी तय नहीं हुई है। फिलहाल जांच एजेंसियां मलबे, इंजन, ईंधन सैंपल और एटीसी डेटा की गहन जांच कर रही हैं। अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत ICAO समेत अन्य एजेंसियों से भी समन्वय किया जा रहा है।