धनबाद नगर निगम के फैसले ने खड़ा किया विवाद, होटल व्यवसायियों पर सख्ती..बिना नक्शे के भवन मालिकों को मिली बड़ी राहत

Dhanbad: नगर निगम ने बिना नक्शा स्वीकृति के बने भवनों को राहत देते हुए झारखंड अनाधिकृत भवन नियमितीकरण नियमावली 2026 लागू कर दी है. इसके तहत 31 दिसंबर 2024 तक बने भवनों को वैध किया जाएगा. इसके लिए भवन मालिकों को 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इस नियम के अंतर्गत केवल रैयती जमीन पर बने भवन ही नियमित किए जाएंगे.
 

Dhanbad: धनबाद नगर निगम (DMC) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है जिससे शहर के बिना नक्शा (बिना स्वीकृत भवन प्रथम योजना) बने भवनों के मालिकों को राहत मिली है, लेकिन वहीं कुछ अन्य फैसलों को लेकर होटल व्यवसायियों में नाराज़गी भी देखी जा रही है. 

कोयलांचल के होटल में ठहरना अब पहले से अधिक महंगा हो जायेगा. नगर निगम ने होटल पर 2 से 5 फीसदी तक नगरीय पर्यटन सेस लगाने का निर्णय लिया है. वहीं बिना नक्शा के बने भवनों के लिए राहत की खबर है. ऐसे निर्माण को वैध करने के लिए नई नियमावली लागू कर दी गई है. लेकिन धनबाद में होटल सेवाओं का लाभ उठाने वालों को अब अधिक खर्च उठाना होगा. जिसकी अधिसूचना जारी कर दी गई है.

निगम द्वारा यह सेस कमरे के किराए के अलावा होटल द्वारा दी जाने वाली अन्य सेवाओं पर भी लागू होगा. लेकिन जीएसटी इससे अलग रहेगा. होटल संचालकों को प्रत्येक तिमाही के बाद 15 दिनों के भीतर यह कर जमा करना अनिवार्य होगा. नगर निगम का कहना है कि इस कदम से शहर में पर्यटन व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सकेगा और राजस्व में वृद्धि होगी.

हालांकि, होटल और रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है. होटल संघ के अध्यक्ष अमरेंद्र सहाय ने कहा कि पहले से ही कई प्रकार के टैक्स का बोझ है. ऐसे में नया सेस कारोबार पर अतिरिक्त दबाव बनाएगा. नई व्यवस्था के तहत सभी होटलों के लिए पंजीकरण जरूरी होगा. नए होटल को सात दिनों के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होगा, प्रत्येक होटल को यूनिक आईडी दी जाएगी और टैक्स जमा करने में देरी होने पर जुर्माना और ब्याज भी लगाया जाएगा.

बिना नक्शे के बने भवन पर निगम ने दी राहत

दूसरी ओर नगर निगम ने बिना नक्शा स्वीकृति के बने भवनों को राहत देते हुए झारखंड अनाधिकृत भवन नियमितीकरण नियमावली 2026 लागू कर दी है. इसके तहत 31 दिसंबर 2024 तक बने भवनों को वैध किया जाएगा. इसके लिए भवन मालिकों को 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन आवेदन करना होगा. इस नियम के अंतर्गत केवल रैयती जमीन पर बने भवन ही नियमित किए जाएंगे. अधिकतम तीन मंजिला या 10 मीटर तक ऊंचाई वाले निर्माण को ही मान्यता मिलेगी.

नियम के तहत नक्शा पास होने के बाद ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा और पहले से चल रहे मामले भी समाप्त कर दिए जाएंगे. लेकिन नाले, सरकारी या आदिवासी जमीन पर बने भवन इस योजना के दायरे से बाहर रहेंगे. नगर निगम के इस फैसले से जहां होटल उद्योग में चिंता बढ़ी है, वहीं बड़ी संख्या में भवन मालिकों को राहत मिलने की उम्मीद है.