मई 2026 की राज्य रैंकिंग में पूर्वी सिंहभूम ने मारी बाजी, शिक्षा के क्षेत्र में झारखंड का नंबर वन जिला बना
Jamshedpur: झारखंड में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में पूर्वी सिंहभूम जिले ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है. मई 2026 की राज्य स्तरीय रैंकिंग में पूर्वी सिंहभूम ने पहला स्थान प्राप्त कर शिक्षा के क्षेत्र में पूरे राज्य में अपनी अलग पहचान बनाई है. जिले ने विभिन्न शैक्षणिक मानकों, विद्यालयों के प्रदर्शन, छात्र उपस्थिति, शिक्षण गुणवत्ता और प्रशासनिक कार्यों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह मुकाम हासिल किया.
24 जिलों के शैक्षणिक प्रदर्शन, प्रशासनिक दक्षता और बुनियादी ढांचे के मूल्यांकन के बाद पूर्वी सिंहभूम को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है. यह उपलब्धि किसी एक परीक्षा परिणाम का नतीजा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित मॉनिटरिंग, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और डेटा आधारित प्रबंधन का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडेय की टीम के प्रयासों का असर अब राज्य स्तरीय रैंकिंग में साफ दिखाई देने लगा है.
पिछले कुछ महीनों की रैंकिंग पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है. दिसंबर 2025 में जिला पांचवें स्थान पर था. जनवरी 2026 में यह सातवें स्थान पर खिसक गया, जबकि फरवरी में 11वें स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद मार्च में जिले ने शानदार वापसी करते हुए चौथा स्थान हासिल किया और अप्रैल-मई 2026 की रिपोर्ट में सीधे पहले स्थान पर पहुंच गया. यानी कुछ ही महीनों में जिले ने तीन पायदान की छलांग लगाकर रामगढ़ और लोहरदगा जैसे जिलों को पीछे छोड़ दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा संचालन पर विशेष ध्यान, समय पर डेटा रिपोर्टिंग और मजबूत जिला स्तरीय समन्वय के कारण यह सफलता संभव हुई है.
पिछले महीनों में पूर्वी सिंहभूम की रैंकिंग
- दिसंबर: 5वां स्थान
- जनवरी: 7वां स्थान
- फरवरी: 11वां स्थान
- मार्च: चौथा स्थान
- अप्रैल-मई: पहला स्थान
शिक्षा विभाग की समीक्षा रिपोर्ट 13 प्रमुख मानकों के आधार पर तैयार की गई है. इसमें हाई प्रायोरिटी संकेतकों को 70 प्रतिशत और इनेबलर्स को 30 प्रतिशत महत्व दिया गया है.
झारखंड के टॉप-5 जिले
- पूर्वी सिंहभूम: 77.95 प्रतिशत (रैंक-1)
- लोहरदगा: 69.77 प्रतिशत (रैंक-2)
- रामगढ़: 68.56 प्रतिशत (रैंक-3)
- सरायकेला-खरसावां: 67.88 प्रतिशत (रैंक-4)
- दुमका: 67.31 प्रतिशत (रैंक-5)
वहीं दुमका, धनबाद और हजारीबाग ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है.
सबसे पिछड़े तीन जिले
- गिरिडीह: 49.81 प्रतिशत (रैंक-22)
- गोड्डा: 46.25 प्रतिशत (रैंक-23)
- गढ़वा: 45.49 प्रतिशत (रैंक-24)
रिपोर्ट के अनुसार खूंटी और गढ़वा की रैंकिंग में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है.
जिले ने जैक मैट्रिक परीक्षा 2026 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. पूर्वी सिंहभूम के 128 स्कूलों में एक भी छात्र फेल नहीं हुआ. इस मामले में जिले ने गुमला के 127 और दुमका के 100 स्कूलों को पीछे छोड़ दिया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां सभी विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की. केवल चार स्कूल ऐसे रहे, जहां 20 प्रतिशत से अधिक छात्र असफल हुए. यह आंकड़ा रांची के 14 और पश्चिमी सिंहभूम के 15 स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है.
मैट्रिक परीक्षा में जिले का औसत पास प्रतिशत 98 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राज्य के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में शामिल है. विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों संकायों में पूर्वी सिंहभूम के स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां तीनों संकायों में शत-प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए. यह उपलब्धि हजारीबाग, रांची और धनबाद जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों से भी बेहतर रही.
प्रथम श्रेणी में उत्कृष्ट परिणाम
- विज्ञान संकाय में 21 स्कूलों के सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए.
- वाणिज्य संकाय में 13 स्कूलों ने यह उपलब्धि हासिल की.
- कला संकाय में तीन स्कूलों के सभी छात्र प्रथम श्रेणी से पास हुए.
100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूल
- विज्ञान: 40 स्कूल
- वाणिज्य: 30 स्कूल
- कला: 21 स्कूल
पूर्वी सिंहभूम के सरकारी और सहायता प्राप्त 1,675 स्कूलों में अप्रैल महीने के दौरान विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 66.50 प्रतिशत दर्ज की गई. इस क्षेत्र में जिले ने पांच रैंक का सुधार किया है.