CM के निर्देश के बाद भी नहीं बना विवि सेवा आयोग, झारखंड के विश्वविद्यालयों में कब होगी नियुक्ति? 6000 पद खाली
Ranchi: झारखंड के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की कमी और नियुक्तियों में देरी का असर अब उच्च शिक्षा व्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कहीं नियमित शिक्षकों के अभाव में कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं, तो कहीं वर्षों से प्रोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षक परेशान हैं। वहीं, झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) की अगली परीक्षा को लेकर भी अभ्यर्थियों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है। इन तमाम समस्याओं के समाधान के लिए प्रस्तावित झारखंड विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन अब तक नहीं हो पाया है। इसका असर राज्य में 6000 से अधिक नियुक्तियों पर पड़ रहा है।
CM ने 15 दिनों में आयोग बनाने का दिया था निर्देश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 13 जुलाई 2026 को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन कर उसे क्रियाशील बनाने का निर्देश दिया था। आयोग बनाने के पीछे उद्देश्य विश्वविद्यालयों में अधिकारियों, शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के रिक्त पदों पर समयबद्ध नियुक्ति और प्रोन्नति सुनिश्चित करना था।
हालांकि, मुख्यमंत्री के निर्देश के साढ़े तीन महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी आयोग का गठन नहीं हो सका है। जानकारी के मुताबिक, इसके गठन से संबंधित संचिका फिलहाल वित्त विभाग में लंबित है। इस देरी के कारण करीब 3500 शिक्षकों, 23 अधिकारियों और लगभग 1500 शिक्षकेतर कर्मचारियों के पदों पर नियुक्ति प्रभावित हो रही है। वहीं, चतुर्थवर्गीय कर्मचारियों की नियुक्ति अब आउटसोर्सिंग के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है।
कानून बना, लेकिन आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का इंतजार
झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम-2026 में विश्वविद्यालय सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। 28 अप्रैल 2026 को जारी इस अधिनियम के अनुसार आयोग का मुख्यालय रांची में होगा। इसमें एक अध्यक्ष, एक प्रशासनिक सदस्य और तीन अन्य सदस्य शामिल होंगे। सभी पद पूर्णकालिक होंगे और नियुक्ति राज्य सरकार करेगी।
अधिनियम में अध्यक्ष और सदस्यों की योग्यता भी निर्धारित की गई है। अध्यक्ष पद पर राज्य सरकार के प्रधान सचिव, केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अपर सचिव, पूर्व कुलपति या किसी संस्थान के निदेशक को नियुक्त किया जा सकता है। प्रशासनिक सदस्य के लिए भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और अनुभवी सेवानिवृत्त प्रोफेसरों का प्रावधान है। इसके अलावा आयोग में एक सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी, एक सेवानिवृत्त प्रोफेसर और एक सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारी या अनुभवी अधिवक्ता सदस्य होंगे।
लेकिन कानून में व्यवस्था बनने के बावजूद अध्यक्ष और सदस्यों के चयन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से आयोग अब तक काम शुरू नहीं कर सका है।
3500 शिक्षकों की कमी से विश्वविद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित
राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के हजारों पद खाली हैं। इसका सीधा असर नियमित कक्षाओं, प्रैक्टिकल, शोध निर्देशन और परीक्षा के मूल्यांकन पर पड़ रहा है। झारखंड हाईकोर्ट में विश्वविद्यालयों की ओर से दिसंबर 2024 में दाखिल हलफनामों में भी रिक्त पदों की गंभीर स्थिति सामने आई थी।
रांची विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 850 स्वीकृत पदों में 528 खाली हैं। सिदो-कान्हू मुर्मू विश्वविद्यालय में 809 में से 575 पद रिक्त हैं। विनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय में 536 पदों में 373 खाली हैं, जबकि कोल्हान विश्वविद्यालय में 753 पदों में 508 पदों पर नियुक्ति नहीं हुई है। नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय में भी 326 पद रिक्त बताए गए हैं।
प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर के पदों पर भी बड़ी संख्या में रिक्तियां हैं। नियमित शिक्षकों की कमी के कारण कई विभागों में 600 से अधिक अतिथि और आवश्यकता-आधारित शिक्षकों के सहारे पढ़ाई संचालित की जा रही है।
JET का इंतजार कर रहे 1.75 लाख अभ्यर्थी
विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन नहीं होने का असर केवल मौजूदा शिक्षकों और नियुक्तियों पर ही नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं पर भी पड़ रहा है। करीब 18 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद वर्ष 2025 में झारखंड पात्रता परीक्षा (JET) आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में छह जिलों के 434 केंद्रों पर लगभग 1.75 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। हालांकि, बाद में परीक्षा रद्द कर दी गई।
नये विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत JET आयोजित कराने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय सेवा आयोग को दी गई है। ऐसे में आयोग का गठन नहीं होने से अगली परीक्षा की समय-सीमा स्पष्ट नहीं हो पा रही है। इसका असर पीएचडी में दाखिले और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों पर पड़ रहा है।
प्रोन्नति में देरी से शिक्षकों की परेशानी बढ़ी
विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के साथ शिक्षकों की प्रोन्नति का मामला भी लंबे समय से लंबित है। शिक्षक संगठनों के अनुसार, वर्ष 2008 में नियुक्त शिक्षकों की प्रोन्नति प्रक्रिया काफी समय से विवादों में रही है। अक्टूबर 2025 में जेपीएससी ने इस बैच के 488 असिस्टेंट प्रोफेसरों को स्टेज-1 से स्टेज-2 में प्रोन्नति देने की प्रक्रिया शुरू की थी।
लेकिन जेपीएससी की परीक्षाओं की सीआईडी जांच और अध्यक्ष समेत सभी सदस्यों के इस्तीफे के बाद स्टेज-2 से स्टेज-4 तक की प्रोन्नति प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसका असर विश्वविद्यालयों में वरिष्ठ शैक्षणिक पदों पर भी पड़ा है। शिक्षक संगठनों के मुताबिक, राज्य के सरकारी विश्वविद्यालयों में अब केवल दो प्रोफेसर बचे हैं।
अब आयोग के गठन पर टिकी निगाहें
झारखंड में विश्वविद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की नियुक्ति, समय पर प्रोन्नति और पात्रता परीक्षा का नियमित आयोजन जरूरी है। इसके लिए विश्वविद्यालय सेवा आयोग को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है। लेकिन अधिनियम जारी होने और मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद आयोग का गठन लंबित है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि वित्त विभाग में अटकी संचिका कब आगे बढ़ेगी और राज्य सरकार आयोग का गठन कर नियुक्तियों की प्रक्रिया कब शुरू करेगी। तब तक हजारों रिक्त पदों और लाखों अभ्यर्थियों की उम्मीदों पर अनिश्चितता बनी रहेगी।